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बिहार चुनाव: कांग्रेस के इन पांच चेहरों पर गठबंधन से लेकर टिकट बंटवारे और जीत का दारोमदार, जानें- किसे क्या जिम्मेदारी?

बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल राज्यसभा सांसद हैं। सौराष्ट्र के राजसी घराने लिमडा से ताल्लुक रखने वाले शक्ति सिंह गोहिल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते हैं।

बिहार में कांग्रेस ने टिकट बंटवारे और सीट शेयरिंग के मुद्दे पर बात करने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है। (इमेज सोर्स – ट्विटर/ फाइल)

बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे लेकर राजनैतिक पार्टियां अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में जुटी हैं। कांग्रेस भी चुनाव के लिए कमर कस चुकी है और गठबंधन से लेकर टिकट बंटवारे तक की जिम्मेदारी के लिए पार्टी ने एक स्क्रीनिंग कमेटी गठित कर दी है। चुनाव में पार्टी की रणनीति संबंधी संबंधी फैसले इसी स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा लिए जाएंगे। कह सकते हैं कि इस स्क्रीनिंग कमेटी पर ही बिहार में कांग्रेस की नैया पार लगाने का दारोमदार होगा।

कांग्रेस महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है। ऐसे में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे और टिकट बंटवारे में यह कमेटी ही अहम फैसले लेगी। कांग्रेस की इस स्क्रीनिंग कमेटी में पांच नेताओं का शामिल किया गया है। जिनमें आल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव अविनाश पांडे, बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्तिसिंह गोहिल, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा, बिहार में कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह और देवेंद्र यादव और काजी निजामुद्दीन शामिल हैं। अविनाश पांडेय इस कमेटी के चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं।

अविनाश पांडेः AICC के महासचिव अविनाश पांडे पूर्व राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। नागपुर से ताल्लुक रखने वाले अविनाश पांडे इससे पहले यूथ कांग्रेस में भी महासचिव रह चुके हैं। अविनाश पांडे राजस्थान में कांग्रेस प्रभारी भी थे और हालिया राजस्थान संकट से पार्टी को उबारने में अविनाश पांडे की भी अहम भूमिका रही थी। हालांकि अब पार्टी ने उन्हें राजस्थान प्रभारी की भूमिका से मुक्त कर बिहार चुनाव की जिम्मेदारी दी है। अविनाश पांडे की पार्टी संगठन पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। नागपुर से ताल्लुक रखने वाले पांडे राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं।

शक्ति सिंह गोहिलः बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल राज्यसभा सांसद हैं। सौराष्ट्र के राजसी घराने लिमडा से ताल्लुक रखने वाले शक्ति सिंह गोहिल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते हैं। यूथ कांग्रेस के साथ अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत करने वाले गोहिल भावनगर विधानसभा से विधायक भी रह चुके हैं। गोहिल गुजरात सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2014 में पार्टी ने उन्हें एआईसीसी का प्रवक्ता बनाया था। पार्टी ने 2018 में उन्हें बिहार प्रभारी की जिम्मेदारी दी थी।

मदन मोहन झाः बिहार विधानसभा के सदस्य मदनमोहन झा बिहार कांग्रेस अध्यक्ष हैं। साल 2018 में मदन मोहन झा को यह जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि मदन मोहन झा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेला है। बिहार में आठ फीसदी ब्राह्मण वोटर हैं। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि मदन मोहन झा कितने फीसदी वोटों को कांग्रेस में पाले में खींच सकते हैं। मदन मोहन झा ने एनएसयूआई के जरिए अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत की थी।

सदानंद सिंहः कहलगांव विधानसभा से कांग्रेस विधायक सदानंद सिंह लंबे समय से कांग्रेस के साथ जुड़े हैं और फिलहाल कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं। सदानंद सिंह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं और पार्टी के अनुभवी नेताओं में शुमार किए जाते हैं। सदानंद सिंह को इलाकाई राजनीति का कद्दावर नेता माना जाता है। हालांकि ऐसी भी चर्चाएं हैं कि इस बार सदानंद सिंह की जगह उनके बेटे विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

काजी निजामुद्दीनः काजी निजामुद्दीन को कांग्रेस ने स्क्रीनिंग कमेटी में बतौर सदस्य शामिल किया गया है। फिलहाल काजी निजामुद्दीन एआईसीसी (संगठन) सचिव के पद पर तैनात हैं और उत्तराखंड की मंगलौर विधानसभा से विधायक हैं।

देवेंद्र यादवः देवेंद्र यादव एआईसीसी के सचिव हैं और राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के सह-प्रभारी हैं। देवेंद्र यादव दिल्ली की बादली विधानसभा से विधायक रह चुके हैं।

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