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बिहार चुनाव: बीजेपी सांसद को सुननी पड़ी खरी-खरी, पहले कांग्रेस और अब भाजपा नेताओं की गुटबाजी का शिकार हो रहा भागलपुर

सांसद निशिकांत दुबे का पैतृक घर भागलपुर है। और वे सांसद गोड्डा से है। यह बात उन्हें हमेशा खटकती है। यह दर्द उन्होंने होली पर वसंत गोष्ठी में आयोजित कवि सम्मेलन के सार्वजनिक मंच से भी बयां किया था।

ashwini choubey bihar election bhagalpur newsअश्विनी चौबे भागलपुर सीट से बेटे को टिकट दिलाने की जुगत में हैं। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनैतिक दल अपनी तैयारियों में लगे है। इसी बीच भागलपुर आए दो भाजपा नेताओं के दौरे को लेकर तरह-तरह चर्चाएं हो रही है। चर्चा है कि इन नेताओं की यात्रा का मकसद कहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के मंसूबों पर पानी फेरना तो नहीं? चौबे अपने बेटे को भागलपुर शहरी सीट से फिर टिकट दिलाने की जुगत में है। चौबे बहरहाल बक्सर लोकसभा सीट से सांसद हैं और भागलपुर शहरी क्षेत्र से पांच दफा भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत कर विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके है।

झारखंड गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन का चौबे से छत्तीस का आंकड़ा बताया जाता है। ये दोनों ही हाल-फिलहाल क्षेत्र भ्रमण कर गए है। अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित सारस्वत चौबे 2015 का चुनाव इसी आपसी गुटबाजी की वजह से हार गए थे। तब बागी बने विजय कुमार साह ने इनकी जीत में रोड़ा अटका दिया था। विजय को 15 हजार से ज्यादा मत हासिल हुए थे और अर्जित कांग्रेस के महागठबंधन उम्मीदवार अजित शर्मा से 11 हजार करीब वोटों से शिकस्त खा गए थे। नतीजों से जाहिर है कि वह गुटबाजी का शिकार हुए।

उस वक्त दबी जुबान से शाहनवाज हुसैन गुट के लोगों ने बदला लेने की बात कही थी। दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में इसी गुटबाजी का शिकार शाहनवाज हुसैन हुए थे। शाहनवाज 9 हजार के करीब वोटों से महागठबंधन उम्मीदवार राजद के शैलेश कुमार से हार गए थे जबकि 11 हजार से ज्यादा मत नोटा में पड़े थे।

2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने शाहनवाज को टिकट नहीं दिया। भागलपुर सीट भाजपा की गुटबाजी की वजह से जदयू के हिस्से चली गई और जदयू के अजय मंडल जीते। शाहनवाज हुसैन का टिकट कट जाने का बदला कहीं विधानसभा चुनाव में अर्जित का टिकट कटवा कर लेने की फिराक में तो नहीं? ऐसा संकेत मिल रहे है। भागलपुर शहरी सीट आरएसएस कोटे वाली मानी जाती रही है। अश्विनी चौबे की आरएसएस में अच्छी पैठ है। बताते है कि इसी बदौलत इन्हें 2015 लोकसभा चुनाव में बक्सर सीट मिली थी और वे कामयाब भी हुए थे।

वहीं सांसद निशिकांत दुबे का पैतृक घर भागलपुर है। और वे सांसद गोड्डा से है। यह बात उन्हें हमेशा खटकती है। यह दर्द उन्होंने होली पर वसंत गोष्ठी में आयोजित कवि सम्मेलन के सार्वजनिक मंच से भी बयां किया था। हालांकि तीसरी दफा इन्होंने अपने विकास कामों के बल पर गोड्डा से जीत हासिल की है। मगर इन दिनों वे वहां विवादों में है। शायद वे अपनी जमीन 2024 के लिए तैयार करने में अभी से भागलपुर में लगे है। ऐसा इनके नजदीकी भी समर्थक कहते है।

बिहार विधानसभा चुनाव में अपने चहेतों को भागलपुर ज़िले की सीटों पर टिकट दिलवाने में भी दिलचस्पी लेने की वजह से भी इनका दौरा अहम माना जा रहा है। ऐसे भी केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे भी सांसद दुबे के इलाके में स्थित बाबा बैद्यनाथ की पूजा करने जाते रहते है। देवघर में एम्स निर्माण को लेकर इनके परस्पर विरोधी बयान आए है। इसको लेकर भी खुंदक बढ़ी है। एम्स को मंजूरी दिलवाने में दोनों अपना दावा पेश करते है। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्वजातीय और भागलपुर ज़िले के होने के बावजूद दोनों में आपस में तालमेल नहीं है।

वहीं भाजपा के वरीय कार्यकर्ता अभय वर्मन बताते है कि भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अगल-बगल के भाजपा सांसदों को पंचायतों में कार्यकर्ताओं के बीच जाकर चुनाव के लिए हौंसला आफजाई करने का फरमान दिया है। उसी के तहत इनका दौरा हुआ है। मगर इनके दौरे में अश्विनी चौबे के समर्थको ने अपने को दूर रखा। वैसे बता दें कि अभय वर्मन ने भी भागलपुर सीट पर अपनी दावेदारी ठोकी है। इनके अलावे भागलपुर नगर निगम की पूर्व उपमहापौर व पार्षद प्रीति शेखर ने भी उम्मीदवारी के लिए आवेदन दिया है।

पूर्व सांसद शाहनवाज हुसैन ने भागलपुर आकर 21 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पुल की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर चौंका दिया था। विक्रमशिला पुल के जाम के हालात और भागलपुर की पीड़ा को समझ 2017 में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समांतर पुल निर्माण की पहल की थी। हालांकि इस आयोजन में जदयू के नेता व कार्यकर्ताओं ने अपनी दूरी बनाए रखी।

दूसरी तरफ अर्जित चौबे ने उड़ान योजना के तहत भागलपुर से छोटे विमान उड़ने की बात कही थी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने हाल ही में नागरिक उड्डयन केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी से मिलकर इस बाबत पहल की है। इस पर शाहनवाज ने उनकी काट करते हुए कहा कि ‘यहां से छोटे नहीं बड़े विमान उड़ान भरेंगे।’ यह दिन कब आएगा? यह किसी को नहीं पता। पर, चुनाव के वक्त नेताओं की जुबान पर हवाई जहाज भागलपुर से उड़ने लगते है। यह हवाई सपना है।

अभय वर्मन भी कहते है कि हवाई जहाज उड़कर रहेगा। मगर कब? यह भी अच्छे दिन वाला जुमला ही बन गया है। स्मार्ट सिटी परियोजना पर भी बैठकें ही हो रही है। काम नहीं हो रहा है।

जाहिर है आपसी गुटबाजी ने भागलपुर का बेड़ा गरक कर दिया है। कांग्रेस के राज में भागवत झा आजाद और शिवचंद्र झा की राजनीति ने भागलपुर को डंसा। अब भाजपा की गुटबाजी। चेंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष अशोक भिवानीवाला कहते है कि गौशाला में हुई सांसद निशिकांत दुबे के साथ बैठक में काफी खरीखोटी सुनाई गई पर नतीजा सिफर है।

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