बिहार सरकार ने बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए 18 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का मंगलवार को तबादला कर दिया है, इनमें भोजपुर और सिवान के एसपी के भी नाम शामिल हैं, जहां छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद हुआ था। सिवान में जिस कॉन्स्टेबल पर AK-47 राइफल से गोली चलाने का आरोप है, उसे पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।

जानकारी दे दें कि 25 जुलाई को सिवान में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने AK-47 का इस्तेमाल किया था, इसे लेकर राज्य में विवाद जोरों पर है।

सिवान के एसपी का ट्रांसफर

राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, सरकार ने सिवान के पुलिस अधीक्षक IPS पूरन कुमार झा का तबादला कर दिया है। पूरन कुमार झा को अभी नई पोस्टिंग के लिए इंतजार करना होगा, उनका नाम वेटिंग लिस्ट में रखा गया है और उनकी जगह भरत सोनी को सिवान का एसपी बनाया गया है।

भोजपुर के एसपी का भी तबादला

भोजपुर के एसपी राज का भी तबादला कर दिया गया है; उनके कार्यकाल में भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर काफी हंगामा हुआ था। अब भोजपुर की कमान अवधेश दीक्षित को सौंप दिया गया है।

अन्य अफसरों के भी हुए तबादले

हृदय कांत को नालंदा का नया एसपी बनाया गया है, जबकि भरत सोनी को सिवान का एसपी नियुक्त किया गया है।

अन्य तबादलों में, टेलीकम्युनिकेशन और टेक्निकल सर्विसेज़ के DIG अनिल कुमार को प्रोहिबिशन एंड एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) में तैनात किया गया है। DIG (विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) मृत्युंजय कुमार चौधरी का तबादला सिविल डिफेंस यूनिट में कर दिया गया है, जबकि DIG (SC और महिला सेल, क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट) आमिर जावेद को विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो में तैनात किया गया है।

एसपी (साइबर इन्वेस्टिगेशन और इकोनॉमिक ऑफ़ेंस यूनिट के ऑपरेशन्स) राजेश कुमार का तबादला प्रोहिबिशन एंड स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में कर दिया गया है। इधर सारण के एसएसपी विनीत कुमार को एंटी-टेररिज्म स्क्वाड में तैनात किया गया है, जबकि एसपी (सीआईडी) रामानंद कुमार कौशल का तबादला एसपी (विजिलेंस यूनिट) के तौर पर किया गया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक, रोहतास के एसपी रोशन कुमार को सारण का एसएसपी बनाया गया है।

तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल

बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को ही मामले को लेकर सवाल उठाए हैं कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान तैनात एक कॉन्स्टेबल को AK-47 कैसे मिली और किस यूनिट या आर्मरी ने इसे जारी किया।

तेजस्वी यादव ने यह भी पूछा कि हथियार जारी करने की इजाजत किसने दी और क्या AK-47 जैसे आधुनिक हथियार को देने में शामिल पूरी कमांड चेन की जांच नहीं होनी चाहिए।

AK-47 विवाद पर बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जानकारी दी है कि कॉन्स्टेबल ने AK-47 से चार राउंड फायरिंग तब की जब वह प्रदर्शनकारियों से घिर गया था और ये गोलियां हवा में चलाई गई थीं। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि उन चार राउंड फायरिंग से कोई घायल नहीं हुआ।

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब उन याचिकाओं के सिलसिले में दाखिल किया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व वाले आंदोलन से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने जरूरत से अधिक बल का इस्तेमाल किया।

चार राउंड की फायरिंग

राज्य के हलफनामे के मुताबिक, AK-47 वाली घटना 25 जुलाई को सिवान में JP चौक के पास हुई थी। आरोप है कि प्रदर्शन उग्र होने के बाद कॉन्स्टेबल अभिषेक कुमार को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह भीड़ में फंस गए थे और हालात से निपटने की कोशिश में उन्होंने अपनी AK-47 से चार राउंड हवाई फायरिंग किए।

बिहार सरकार ने कहा कि उस फायरिंग से कोई भी प्रदर्शनकारी छात्र घायल नहीं हुआ। हालांकि, राज्य ने यह माना कि उस दिन पुलिस की कार्रवाई के दौरान 3 प्रदर्शनकारियों को बंदूक से मामूली चोटें लगीं। उन्होंने साफ तौर पर उन चोटों और अभिषेक कुमार की AK-47 के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया।

हलफनामे के मुताबिक, घायल हुए तीनों प्रदर्शनकारी उस जगह पर मौजूद नहीं थे जहाँ से कॉन्सटेबल ने राइफल से फायर किया था, इसलिए सरकार ने कहा कि उनके ओर से चलाई गई चार गोलियों से ये चोटें नहीं लग सकतीं हैं।

जरूरत से अधिक बल इस्तेमाल नहीं किया गया- बिहार सरकार

हलफनामे में विरोध-प्रदर्शन के दौरान फायरिंग की एक और घटना का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर नीलेश कुमार सिंह ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हाथी चौक के पास अपनी 9एमएम पिस्तौल से दो राउंड फायर किए।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान संयम बरता और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से अधिक बल का इस्तेमाल नहीं किया।

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केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र को चिराग पासवान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर भी किया है। पत्र में चिराग पासवान ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का जिक्र किया है और बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि इस नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले छात्रों, शिक्षको और विशेषज्ञों के हितों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें