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भर्ती में बड़ा घोटाला, भड़की सियासी ज्वाला

उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग अपने जन्म के साथ ही घोटालों का अड्डा बना रहा।

भर्ती में बड़ा घोटाला, भड़की सियासी ज्वाला

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग प्रश्न पत्र लीक घोटाले को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस मामले में विशेष पुलिस बल एसटीएफ की गई कार्रवाई से कई चेहरों के नकाब उतर गए हैं। अभी कई चेहरों के नकाब उतरने बाकी है। माना जा रहा है कि एसटीएफ की लगातार जारी कार्रवाई से पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत और भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सख्त नाराज बताए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, एसटीएफ ने इस मामले के मास्टरमाइंड उत्तरकाशी जिला पंचायत सदस्य व भाजपा नेता हाकम सिंह रावत और उसके एक साथी तुषार चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। हाकम सिंह रावत की गिरफ्तारी के तुरंत बाद प्रदेश भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। माना जा रहा है कि यह भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष खेमे का है। अब तक इस मामले में 18 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और एसटीएफ की कार्रवाई भी लगातार जारी है।

पुलिस ने जिस तुषार चौहान को गिरफ्तार किया है वह खुद परीक्षा में अभ्यर्थी था और नकल करके परीक्षा पास भी की थी। एसटीएफ ने इस घोटाले के आरोपियों की खोजबीन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक की है. इस मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाली बात सामने आई है कि प्रश्न पत्र बनाने के लिए जिस कंपनी को काम दिया गया था, उसके दफ्तर से पेपर प्रिंटिंग और पैकिंग के दौरान के सीसीटीवी फुटेज गायब हैं। जांच को प्रभावित करने के लिए और सबूत मिटाने के लिए यह सब साजिश के तहत किया गया।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह का कहना है कि इस मामले में किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा और तह तक जाया जाएगा। दूसरी ओर, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। राजू ने त्यागपत्र की घोषणा करने के साथ ही कहा कि चयन आयोग पर कोचिंग इंस्टीट्यूट और नकल माफिया का दबाव है। शिक्षा से जुड़े परीक्षा माफिया आयोग को अपनी गिरफ्त में लेना चाहते हैं। इसलिए वे आयोग को बदनाम कर रहे हैं।

यह माफिया नहीं चाहते कि आयोग परीक्षाओं को आनलाइन करवाए। राजू वरिष्ठ नौकरशाह हैं। वे राज्य के अपर मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और आइएएस हैं। राजू के बयान और त्यागपत्र के बाद इस मामले ने और जोर पकड़ लिया। राजू ने कहा कि उनका किसी राजनेता से कोई नाता रिश्ता नहीं है। राजू आयोग के दूसरे अध्यक्ष थे। उनसे पहले आयोग के पहले अध्यक्ष आरबीएस रावत थे। रावत को भी ग्राम विकास अधिकारी के पदों की परीक्षा में हुई गड़बड़ी के बाद त्यागपत्र देना पड़ा था। और उनके बाद राजू आयोग के दूसरे अध्यक्ष बनाए गए थे। संयोग देखिए कि आयोग के दोनों अध्यक्ष घोटालों के कारण अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।

इस तरह जून 2014 में स्थापित उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग अपने जन्म के साथ ही घोटालों का अड्डा बना रहा। इस सब घटनाक्रम के कारण के आयोग की भविष्य में करीब सात हजार पदों के लिए होने वाली आठ भर्ती परीक्षाएं भी संकट में पड़ गई हैं। यह भर्ती घोटाला स्रातक स्तरीय परीक्षा के तहत करीब ग्राम विकास अधिकारी सहित अन्य पदों के लिए 854 पदोें में से 500 से अधिक पदों को मोल भाव कर पास किया गया। इसका विवाद इतना गहराया कि सरकार मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाना पड़ा।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने राज्य सरकार के 13 विभागों के 916 स्रातक स्तर के पदों के लिए चार और पांच दिसंबर 2021 को भर्ती कराई थी। इसमें एक लाख 46 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परिणाम घोषित होने से पहले यह परीक्षा विवादों में आ गई थी। दूसरी ओर, इस मामले को लेकर राज्य में सियासत भी जमकर हो रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से छात्रों का मनोबल गिरता है।

जबकि मुख्यमंत्री धामी ने हरीश रावत को जवाब देते हुए इस मामले पर विरोधियों को राजनीति नहीं करने की नसीहत तक दे डाली। धामी ने दो टूक शब्दों में कहा कि ये मुद्दा राजनीति का नही हैं। इस पर राजनीति न हो। अगर राजनेता बात करें तो ऐसे घोटालों के समाधान पर बात करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी और राज्य सरकार की जंग जारी रहेगी।

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First published on: 17-08-2022 at 05:43:45 am