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यूपी: 61 की लिस्‍ट मगर करवा दी 66 जोड़ों की शादी, यूं उड़ी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह के नियमों की धज्जियां

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से शुरू की गई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह विवाह योजना में नियमों को ताक पर रखकर हुई गड़बड़ी सामने आई है।

सामूहिक विवाह

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से शुरू की गई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह विवाह योजना में नियमों को ताक पर रखकर हुई गड़बड़ी सामने आई है। प्रदेश की सामूहिक विवाह योजना में प्रशासन की ओर से 61 जोड़ों को मैरिज लिस्ट में शामिल किया गया था, लेकिन मंडप के नीचे बैठे थे 66 जोड़े। इनमें 21 मुस्लिम और 45 हिंदू जोड़े शामिल थे। यानी इस योजना में 4 ऐसे जोड़ों ने भी फेरे लिए, जिनका लिस्ट में नाम ही नहीं था। मामले की अनदेखी को लेकर अब यूपी प्रशासन कठघरे में है। 61 से ज्यादा जोड़ों के फेरे लेने के बाद अधिकारियों के बीच कहासुनी हुई। लिहाजा, अब इस मामले की जांच हो रही है कि आखिर किसके कहने से चार और जोड़ों को शामिल किया गया था। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि मैरिज लिस्ट में शामिल कई जोड़े मंडप पर पहुंचे ही नहीं, जबकि जिनका नाम लिस्ट में नहीं था, वे पहुंच गए।

गौरतलब है कि 24 फरवरी को इस योजना के तहत ग्रेटर नोएडा के वाइएमसीए क्लब में सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया था। इस भव्य समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने शिरकत की थी। इस योजना के तहत हुए विवाह में कई ऐसे जोड़े भी शामिल हुए, जो पहले से शादीशुदा हैं। एक जोड़े ने 2013 में विवाह रचाया था, जिनका एक बेटा भी है, जबकि एक और कपल ने 2017 के सितंबर में शादी की थी। ऐसे में इस सामारोह में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

इस योजना के तहत गरीब जोड़ों की शादी प्रशासन द्वारा करायी जाती है। साथ ही, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाता है। विवाह करने वाले हर जोड़े पर सरकार 35 हजार रुपए खर्च करती है। इन 35 हजार रुपए में से 20 हजार रुपए जोड़े के बैंक खाते में जमा कराए जाते हैं, वहीं 15 हजार रुपए प्रशासन शादी पर खर्च करता है, जिसमें दुल्हनों को मिलने वाला सामान भी शामिल हैं। सामूहिक विवाह कराने की जिम्मेदारी नगर निगम, नगर पंचायत, नगरपालिका, जिला पंचायत और समाज कल्याण विभाग जैसी संस्थाओं को सौंपी जाती है।

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