नवरात्र‍ि पर छत्‍तीसगढ़ से भगवान राम का कनेक्‍शन याद करेगी बघेल सरकार

‘राम वन गमन पर्यटन परिपथ’ के रूप में 14 साल के वनवास के दौरान श्री राम छत्तीसगढ़ राज्य के ज‍िन इलाकों में गए थे, उन्‍हें व‍िकस‍ित क‍िए जाने की योजना है। 7 अक्‍टूबर को होगा समारोह।

Chhatisgarh, Bhupesh Baghel
शोध के अनुसार वनवास के दौरान भगवान राम छत्तीसगढ़ के लगभग 75 स्थानों से गुजरे थे। (फोटो- फाइनेंशियल एक्सप्रेस फाइल)

छत्‍तीसगढ़ सरकार इस बार नवरात्र‍ि  पर एक भव्‍य आयोजन करने जा रही है। यह आयोजन भगवान राम से जुड़ी एक पर‍ियोजना की शुरुआत पर होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा शुरू किए गए 2021 की नई विकास परियोजना – ‘राम वन गमन पर्यटन परिपथ’ पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। 7 अक्टूबर, 2021 को नवरात्रि के अवसर पर राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुभारंभ का जश्न मनाएगी। जश्‍न का फोकस इस बात पर होगा- बात है अभिमान की, छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान की। 

भूपेश बघेल का कहना है, “अयोध्या से वनवास के दौरान प्रभु श्री राम ने अपना अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया। हमारा प्रयास है कि हम भगवान राम और माता कौशल्या से जुड़ी यादों को संजो सकें, यही वजह  है कि सरकार ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना की कल्पना की जहाँ भक्त और पर्यटक अपने हर कदम के साथ देवत्व के सार को महसूस कर सकेंगे।”

इस भव्य समारोह का आयोजन, चंदखुरी गाँव में स्थित प्राचीन कौशल्या माता का मंदिर, जो रायपुर से लगभग 25 किमी दूर है में किया जाएगा। इस समारोह में संगीत, नृत्य के अलावा लेज़र शो औऱ एलईडी रौशनियों के ज़रिए भव्य लाइट एंड साउंड कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा।

लाइट एंड साउंड शो के जरिए दर्शक भगवान राम के वनवास औऱ वन गमन पथ की कहानी रंग-बिरंगी रौशनियों के ज़रिए सुन और देख सकेंगे। इस कार्यक्रम यह भी है कि आने वाले समय में इसे वार्षिक कार्यक्रम की तरह विकसित किया जा सके ताकि छत्तीसगढ़, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों के लिए एक रोमांचक गंतव्य के रूप में स्थापित हो सके।

राज्य पर्यटन बोर्ड ने सरकार की महत्‍वाकांक्षी परियोजना – राम वनगमन पर्यटन परिपथ – पर काम करने के ल‍िए नवरात्र‍ि  का समय चुना है। यह पर‍िपथ अयोध्या से वनवास के दौरान छत्तीसगढ़ के क्षेत्र में भगवान राम द्वारा किए गए यात्रा मार्ग के ह‍िसाब से चुना गया है। 

इस परियोजना के प्रथम चरण में जंगल के रास्ते उन नौ स्थानों को विकसित करने की योजना है जहाँ से श्री राम ने यात्रा की थी। इन स्थलों में शामिल हैं: सीतामढ़ी- हरचौका, रामगढ़, शिवरीनारायण, तुरतुरिया, चंदखुरी, राजिम, सिहावा, जगदलपुर और रामाराम।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक यशवंत कुमार ने कहा, “हमारी मुख्य प्राथमिकता राम वन गमन पथ के चिन्हित स्थलों को प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना है। अभी चल रही महामारी को ध्यान में रखते हुए, हमारी कोशिश है कि लोग घरेलू पर्यटन के लिए प्रेरित हों। ऐसा करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं और हमें विश्वास है कि राम वनगमन पर्यटन परिपथ उनके के लिए एक रोमांचक अनुभव होगा।“

छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है क‍ि राज्य भगवान राम एवं उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के अलग-अलग जगहों पर वनवास की कहानियों से भरा पड़ा है। भगवान राम की कथाओं से प्रेरित पीढ़ियों से चले आ रही कहानियाँ और गीत यहाँ के समुदायों में सुनाए और गाए जाते हैं।

इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भगवान राम का ननिहाल (माता कौशल्या का जन्म स्थान) है। छत्तीसगढ़ वह स्थान भी है जहाँ अपनी माँ के प्यार और लालन-पालन से पोषित होकर राम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम राम’ बने।

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।