जिंदगी बर्बाद हो गया…भोपाल के शख्स ने एक RTI डाल मांगी जानकारी, डाक विभाग ने दिए 360 जवाब

विभाग आरटीआई आवेदन के मकसद को समझ नहीं पाए हैं। जब आवेदन ऑनलाइन किया गया था, तब जवाब पत्र के माध्यम से भेजने का कोई मतलब है। डाक विभाग इस मुद्दे को समझ नहीं पा रहा है।

भोपाल
उत्तर प्रदेश को 15 करोड़ रुपए का बजट मिलता है। (फोटो सोर्स -इंडियन एक्सप्रेस)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अजीबोगरीब घटना हुई। एक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार के तहत डाक विभाग से एक जानकारी मांगी। इस पर डाक विभाग उसके पास लगातार जवाब भेज रहा है। अब तक उसके पास 360 से अधिक जवाब आ चुके हैं। इसके और अधिक होने की संभावना है। एक ही प्रश्न के इतने अधिक जवाब आने से वह परेशान हो चुका है। खास बात यह है कि उसने ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन जवाब पोस्ट से भेजे जा रहे हैं।

बड़े अफसरों ने नीचे वालों को दी जिम्मेदारी  मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले जितेंद्र सुराणा एक सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार हैं। उन्होंने डाक विभाग में एक आरटीआई भेजकर विभाग की अचल संपत्तियों के बाजार मूल्य के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके बाद विभाग ने चीफ पोस्टमास्टर और सभी पोस्टमास्टर्स जनरल से इस बारे में पूछा। सुराणा का कहना है कि आरटीआई का जवाब देने की जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों को है, लेकिन यह काम डाक अधीक्षक को दे दी गई। उन्हें यह कहा गया कि वे अपने कार्यालयों की जानकारी सीधे आवेदक को दें। इसके बाद उसके पास एक के बाद एक लगातार जवाब आ रहे हैं। उसने बताया कि वह अब परेशान हो चुका है।

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रोजाना दस जवाब मिल रहे हैं  सुराणा का कहना है कि अमूमन प्रतिदिन 10 जवाब रोज मिल रहे हैं। उन्होंने इसी साल 7 अगस्त को आरटीआई के तहत ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके ठीक एक हफ्ते बाद से ही उनके पास जवाब आने लगे।  अब तक 360 से अधिक जवाब मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब आवेदन ऑनलाइन किया था तो जवाब पोस्ट के माध्यम से क्यों भेजे जा रहे हैं।

ज्यादातर जवाब संतोषजनक नहीं  उसने यह भी बताया कि ज्यादातर जवाब संतोषजनक नहीं हैं। अब तक केवल 25-30 जिला और मंडल के डाकघरों ने ही अपनी अचल संपत्तियों के बारे में बताया है। एक मंडलीय डाकघर ने तो उन्हें 1870 के बिल-बुक के बारे में बताया है। नियम के मुताबिक विभाग को सभी जवाब एक साथ करके एक बड़ा जवाब बनाना चाहिए था और उसे ही भेजना था, लेकिन विभाग के उच्चाधिकारी अपनी जिम्मेदारी नीचे वालों को सौंपकर फ्री हो गए।

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