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भोपाल गैस कांड: एंडरसन को भगाने के आरोप में पूर्व कलेक्टर एवं एसपी को हाईकोर्ट से राहत

भोपाल गैस कांड: एंडरसन को भगाने के आरोप में पूर्व कलेक्टर एवं एसपी को हाईकोर्ट से राहत मिली।

Author भोपाल | August 1, 2018 7:08 PM
भोपाल गैस त्रासदी की फाइल फोटो

करीब 34 साल पहले हुए विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस कांड के कुछ दिनों बाद यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन के चेयरमैन वॉरेन एंडरसन (अब दिवंगत) को दिसंबर 1984 में भोपाल से अमेरिका भगाने में मदद पहुंचाने के आरोप में तत्कालीन भोपाल कलेक्टर मोती सिंह तथा तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वराज पुरी को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से आज राहत मिल गयी। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस के पालो की एकलपीठ ने भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) भूभास्कर यादव की अदालत द्वारा सिंह एवं पुरी के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश खारिज कर दिया है। इस मामले को लेकर भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के समन्यवक अब्दुल जब्बार और अधिवक्ता शहनवाज खान ने सीजेएम यादव की अदालत में भोपाल गैस कांड के करीब 26 साल बाद परिवाद दायर करके आरोप लगाया था कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के मालिक वारेन एण्डरसन को भगाने में याचिकाकर्ता तत्कालीन पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी और तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह की अहम भूमिका थी। ऐसे में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए।

भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इन दोनों अधिकारियों (अब दोनों सेवानिवृत्त) के खिलाफ भादंवि की धारा 212, 217 और 221 के तहत 19 नवम्बर 2016 को परिवाद दर्ज करने के निर्देश दिये थे। इस आदेश के खिलाफ दोनों ने उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर उच्च न्यायालय ने आज फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ए पी सिंह ने बताया सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया था कि 26 साल बाद दायर हुए परिवाद पर निचली अदालत ने संज्ञान लिया है, जो कि गलत है। उक्त परिवाद सिर्फ तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह की भोपाल गैस त्रासदी का सच नामक प्रकाशित किताब अंशों के आधार पर दायर किया गया है। सह ने बताया कि एकलपीठ ने कहा कि वारेन एण्डरसन को न्यायालय से जमानत मिल गयी थी और जमानत की शर्तो में इस बात का उल्लेख नहीं था कि अभियुक्त देश से बाहर नहीं जा सकता है। आवेदक सरकार के जिम्मेदार अधिकारी थे और उन पर कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी थी। अपनी जिम्मेदारी का परिपालन करते हुए उन्होंने एंडरसन को सुरक्षित हवाईअड्डे तक पहुंचाया था।

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने याचिका पर 25 अप्रैल को सुनवाई पूरी की थी और कहा था कि फैसला बाद में सुनाया जायेगा। एकलपीठ के आदेश में भोपाल की अदालत में लंबित प्रकरण खारिज कर दिया गया है। वर्तमान में बंद पड़ी भोपाल यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से दो-तीन दिसंबर 1984 की मध्य रात्रि में जहरीली मिथाइल आइसो साइनाइड (मिक) गैस निकलने के चार दिन बाद एंडरसन अमेरिका से मुंबई होते हुए भोपाल आया था, लेकिन कुछ घंटों के लिए गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था। इस जहरीली गैस के रिसाव से करीब 15,000 लोगों की जान गई थी और 5.74 लाख लोग प्रभावित हुए थे।

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