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इन भाषाओं को जल्द मिलेगी मान्यता

भोजपुरी, राजस्थानी, भोटी भाषा को जल्द से जल्द संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की जोरदार मांग करते हुए पूर्वांचल और राजस्थान के अनेक सांसदों का कहना है ...

Author नई दिल्ली | January 11, 2016 1:20 AM

भोजपुरी, राजस्थानी, भोटी भाषा को जल्द से जल्द संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की जोरदार मांग करते हुए पूर्वांचल और राजस्थान के अनेक सांसदों का कहना है कि ऐसी भाषाएं जो भारत के अलावा किन्हीं अन्य देशों में मान्यता प्राप्त हों, उन्हें देश में मान्यता प्रदान करने का मापदंड बनाया जाए।

लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इस बारे में सिद्धांत के तौर पर एकराय है कि भोजपुरी, राजस्थानी और भोटी को मान्यता मिलनी चाहिए। कुछ वर्ग इसे लेकर, हिंदी को नुकसान न हो, यह तर्क उठा रहे हैं। ऐसे में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के संदर्भ में इस बात को मापदंड बनाया जाए कि ऐसी कोई भी भाषा जो भारत के अलावा किसी अन्य देश में प्रमुखता से बोली जाती हो या वहां मान्यता प्राप्त हो, उन्हें संवैधानिक मान्यता प्रदान की जाए।

उन्होंने कहा कि इस तरह से भोजपुरी, राजस्थानी, भोटी भाषा को स्वत: मान्यता मिल जाएगी क्योंकि भोजपुरी मारिशस में मान्यता प्राप्त है, राजस्थानी नेपाल में और भोटी भूटान में। संसद में 100 से अधिक सदस्य भोजपुरी, राजस्थानी और भोटी क्षेत्र से हैं। मेघवाल ने कहा कि वे जगदंबिका पाल और अन्य लोग इस बारे में प्रधानमंत्री से मिल चुके हैं और 18 जनवरी को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से उनका मिलने का कार्यक्रम है।

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अनेक सांसदों ने 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस से पहले इसे मंजूरी प्रदान करने की मांग की है। जगदंबिका पाल ने कहा कि कुछ समय पूर्व पूर्वांचल और राजस्थान के कुछ सांसदों के शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और उनसे काफी समय से लंबित इस वाजिब मांग को पूरा करने की दिशा में पहल का आग्रह किया था ताकि भोजपुरी, राजस्थानी, भोटी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा सके।
इससे पहले सांसदों के इस शिष्टमंडल ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी और इस विषय पर त्वरित पहल किए जाने की जरूरत बताई थी। सीताकांत महापात्र समिति की रिपोर्ट पेश किए जाने के दस साल गुजरने और संसद में और अन्य मंचों से बार-बार मांग किए जाने और सरकारों के आश्वासनों के बावजूद भोजपुरी और राजस्थानी भाषाओं को अब तक अपेक्षित दर्जा नहीं मिला है।

इस विषय को विभिन्न मंचों पर उठाने वाले जगदंबिका पाल, मनोज तिवारी, अर्जुन राम मेघवाल और भोजपुरी समाज के अजीत दुबे का कहना है कि इन भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने में कोई बाधा नहीं है। इनका कहना है कि केंद्र सरकार का रुख इस विषय पर सकारात्मक है।

इनका कहना है कि यूनेस्को के आह्वान पर हर साल 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है, ऐसे में इससे पहले इन तीन भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की औपचारिकताएं पूरी की जाएं ताकि इस बार अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का अलग उल्लास हो। मेघवाल ने कहा कि 38 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग लंबित है, इसमें भोजपुरी, राजस्थानी और भोटी का आधार काफी व्यापक है। इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
इससे पूर्व भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने भी इस विषय को गृह मंत्री के समक्ष उठाया था।

तिवारी ने उम्मीद जताई है कि भोजपुरी, राजस्थानी और भोटी भाषाओं को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी विधेयक जल्द आएगा। तिवारी ने कहा कि भोजपुरी, राजस्थानी और भोटी ऐसी स्थानीय भाषाएं हैं जिनकी व्यापकता और विस्तार को देखते हुए इन्हें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने पर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा, ‘इस विषय को मैंने पुरजोर तरीके से उठाया है। गृह मंत्री के समक्ष भी इसे उठा चुका हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि इन भाषाओं को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी विधेयक जल्द आ जाएगा’।

भोजपुरी समाज के अजीत दुबे ने कहा कि यूनीसेफ ने 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस घोषित किया है और यह दिवस हमारे देश में मनाया भी गया। लेकिन भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा नहीं होने के कारण यह उपेक्षित रहा। सरकार ने देसी भाषाओं के डिजिटलीकरण का प्रस्ताव किया है। लेकिन इसका लाभ केवल अधिसूचित 22 भाषाओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में कई बार भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के बारे में आश्वासन दे चुकी है, इसलिए इसमें देरी नहीं करके तत्काल सकारात्मक फैसला करना चाहिए।

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