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भीमा-कोरेगांव हिंसा: हाई कोर्ट ने एक्टिविस्‍ट आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

भीमा कोरेगांव हिंसा और माओवादियों से तार जुड़े होने का आरोप झेल रहे एक्टिविस्‍ट आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी पर बांबे हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुणे पुलिस को इस बाबत निर्देश दिए हैं।

Author Updated: October 19, 2018 8:59 PM
बांबे हाई कोर्ट ने एक्टिविस्‍ट आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। (बांबे हाई कोर्ट की फाइल फोटो)

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में बांबे हाई कोर्ट ने एक्टिविस्‍ट आनंद तेलतुंबड़े को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर 26 अक्‍टूबर तक के लिए रोक लगा दी है। पुणे पुलिस ने उनके माओवादियों से तार जुड़े होने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया है।

आनंद तेलतुंबड़े पर माओवादियों से संबंध होने के आरोप में महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने मामला दर्ज किया था। आनंद तेलतुम्बड़े के भाई मिलिंद तेलतुम्बड़े प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वरिष्ठ सदस्य हैं। आनंद तेलतुंबड़े दलित विचारक हैं।

पुणे के भीमा कोरेगांव युद्ध की वर्षगांठ के बाद हुई हिंसा में कई बुद्धिजीवियों को पुणे पुलिस ने इसी साल 1 जनवरी को हिरासत में लिया था। पुणे पुलिस ने देश के विभिन्न शहरों में एक साथ छापा मारकर सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवर राव और वर्नान गोंसाल्विस इत्यादि को गिरफ्तार कर लिया था। मामले पर उच्चतम न्यायालय ने सभी आरोपियों को अंतिम फैसले तक उनके घरों में नजरबंद रखने का आदेश दिया था।

वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने की अपील बॉम्बे हाई कोर्ट में की है। इस महीने की शुरूआत में हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में नवलखा ने पुणे पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने का अनुरोध किया है।

पुणे पुलिस ने दावा किया था कि, आरोपियो के पास से जब्त किए गए दस्तावेजों से उनके माओवादी नेताओं के साथ संपर्क होने का खुलासा हुआ है। 28 अगस्त को पांच कार्यकर्ताओं को एक एफआईआर के बाद गिरफ्तार किया गया था। पिछले वर्ष 31 दिसम्बर को ‘एल्गार परिषद’ आयोजित हुई थी, जिससे पुणे में कोरेगांव-भीमा गांव में हिंसा भड़की थी। इसके बाद यह प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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