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महाराष्ट्र में दलित नेताओं-कार्यकर्ताओं के घर व दफ्तर पर छापे, सुबह के 5 बजे से शुरू हुई कार्रवाई

महाराष्ट्र पुलिस ने इस वर्ष 1 जनवरी को हुए कोरेगांव-भीमा दंगा मामले में मंगलवार को कई शहरों में प्रसिद्ध दलित नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ छापे मारे।

Author मुंबई | April 17, 2018 5:56 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

महाराष्ट्र पुलिस ने इस वर्ष 1 जनवरी को हुए कोरेगांव-भीमा दंगा मामले में मंगलवार को कई शहरों में प्रसिद्ध दलित नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने यहां यह जानकारी दी। पुलिस ने तड़के पांच बजे से छापा मारने की कार्रवाई शुरू की। पुणे पुलिस के कई समूहों ने मुंबई, पुणे और नागपुर में कई दलित कार्यकर्ताओं के घरों और कार्यालयों में छापे मारे। पुलिस ने पिछले वर्ष 31 दिसंबर को हुई यलगार परिषद में संलिप्त या संबंधित लोगों के खिलाफ भी सख्त रवैया अपनाया है। इस परिषद को गुजरात के दलित नेता व विधायक जिग्नेश मेवानी, जेएनयू के नेता उमर खालिद, छत्तीसगढ़ की समाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी और भीम आर्मी के अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने संबोधित किया था।

पुणे पुलिस ने नागपुर में प्रसिद्ध वकील सुरेंद्र गडलिंग के घर पर भी छापा मारा और तलाशी ली। वह विभिन्न न्यायालयों में कई कथित नक्सलियों का केस लड़ रहे हैं। पुलिस ने यलगार परिषद के संबंध में वामपंथी संगठन कबीर कला मंच और रिपब्लिकन पैंथर्स पार्टी के परिसरों और रमेश गेचर व सागर गोरखे जैसे नेताओं के खिलाफ छापे मारे।

पुलिस ने मुंबई में वामपंथी कार्यकर्ताओं जैसे सुधीर धवाले और हर्षाली पोटदार के आवासों पर छापे मारे। पुलिस के पास इन सभी स्थानों पर छापे के लिए तलाशी वारंट थे। पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने इसे सरकार की ‘उत्पीड़न और ध्यान भटकाने वाली रणनीति’ बताया।

उन्होंने कहा, “सरकार कोरेगांव-भीमा दंगा भड़काने के मुख्य आरोपी संभाजी भिड़े ऊर्फ गुरुजी को गिरफ्तार करने के स्थान पर इस तरह के ध्यान भटकाने वाली कार्रवाई कर रही है।” संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के परपोते प्रकाश अंबेडकर ने कहा, “पुलिस ने मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी तक भिड़े को गिरफ्तार नहीं किया गया है।”

यलगार परिषद पुणे के शनिवारवड़ा में आयोजित की गई थी। कोरेगांव-भीमा में 1 जनवरी को दंगा हुआ और इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। घटना के विरोध में 3 जनवरी को अंबेडकर और अन्य पार्टियों ने महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया था।

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