बिहार में भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में अंतरिम न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने उनके परिवार के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि सरकार भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाएगी। यह फैसला न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
भोजपुर जिले के बिलौती गांव निवासी भरत तिवारी की 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे इलाके में विवाद खड़ा हो गया था। भरत तिवारी के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि उन्होंने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी रख दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने उन पर गोली चलाई।
बिहार सरकार ने दिए थे न्यायिक जांच के आदेश
मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। परिवार की ओर से शुरुआत से ही एनकाउंटर को संदिग्ध बताते हुए मामले में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की जाती रही है।
अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार का फैसला
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल आर्थिक सहायता की राशि और नौकरी से जुड़ी अन्य विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
परिवार के वकील ने लगाए गंभीर आरोप
भरत तिवारी के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने इससे पहले मामले में कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि भरत तिवारी की हत्या की एक सुनियोजित साजिश रची गई थी और इसमें कई अधिकारी शामिल थे।
वकील के मुताबिक, पांच अलग-अलग पुलिसकर्मियों ने पांच अलग-अलग हथियारों से गोलियां चलाईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 16 जून से ही भरत तिवारी को मारने की कथित साजिश शुरू हो गई थी, जिसमें एक पुलिस अधिकारी, एक एसडीएम और एक स्थानीय नेता के शामिल होने का आरोप लगाया गया।
पांच गोलियां चलने का दावा
परिवार के वकील ने आरोप लगाया कि 17 जून को भरत तिवारी पर पांच गोलियां चलाई गईं। उनके मुताबिक, शुरुआत में तीन गोलियां चलाई गईं और करीब 15 मिनट बाद दो और गोलियां चलाई गईं। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान भरत तिवारी को एक वाहन में जबरन बैठाया गया था।
हालांकि, ये आरोप परिवार और उसके कानूनी प्रतिनिधियों की ओर से लगाए गए हैं। मामले में तथ्यों और आरोपों की अंतिम स्थिति न्यायिक जांच की पूरी रिपोर्ट तथा आगे की कानूनी कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
STF कांस्टेबल अक्षय कुमार गिरफ्तार
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जुलाई में एक पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी भी हुई थी। आरा के एसपी राज ने बताया था कि आरा पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने STF कांस्टेबल अक्षय कुमार को आरा से गिरफ्तार किया। एसपी ने उस समय कहा था कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में शामिल एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया गया है और उसकी पहचान अक्षय कुमार के रूप में हुई है।
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2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व राज्य मंत्री सुरेश राणा सहित 25 भाजपा नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामला वापस लिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
