Punjab Politics: पंजाब के साल 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से आम आदमी पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने का राजनीतिक कद काफी बढ़ गया था। वे इतने अलग-थलग कभी नहीं थे, जितने पिछले कुछ हफ्तों से दिख रहे हैं। एक वायरल वीडियो के आधार पर उन पर कथित तौर पर सिख गुरु का अपमान करने का आरोप लगा है।
भगवंत मान 95 विधायकों वाली प्रचंड बहुमत की सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके बावजूद वे राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं, क्योंकि सिख समाज की सुप्रीम बॉडी यानी अकाल तख्त ने उनकी मुसीबत बढ़ा दी है। अकाल तख्त की तरफ से ये निर्देश दिया गया है कि सिख समाज के लोग भगवंत मान का बहिष्कार करें।
तेजी से बढ़ रही मुश्किलें
अकाल तख्त ने निर्देशों के साथ ही धर्म-अपवित्रता विरोधी कानून को लेकर आप के विधायकों और मंत्रियों को समन जारी किया है। दूसरी ओर भगवंत मान लगातार वायरल वीडियो से जुड़े आरोपों को खारिज करते रहे हैं। भगवंत मान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और आरोपों का खंडन किया और आलोचनाओं का जवाब देने की कोशिश की। यह नज़ारा चौंकाने वाला इसलिए भी था क्योंकि मीडिया कैमरों के सामने अकेले खड़े थे। वे अपना और अपनी सरकार द्वारा विवाद से निपटने के तरीके का बचाव कर रहे थे।
केजरीवाल-सिसोदिया ने साधी चुप्पी
अहम बात यह भी है कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी भगवंत मान के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। इतना ही नहीं, मनगढ़ंत फोरेंसिक रिपोर्टों को लेकर गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर, दो बाद की गिरफ्तारियों, विपक्ष की आलोचना और अंत में अकाल तख्त के अभूतपूर्व निर्देश को लेकर सबसे ज्यादा विवाद हुआ।
इसमें भगवंत मान के सामाजिक बहिष्कार का आह्वान किया गया, तब दोनों में से किसी ने भी सार्वजनिक रूप से कोई हस्तक्षेप नहीं किया। आम आदमी पार्टी एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है, जो कि अपने वरिष्ठ नेतृत्व के इर्द-गिर्द एकजुट होती रही है, लेकिन इस बार AAP के भीतर और बाहर दोनों जगह चुप्पी है।
फॉरेंसिंक रिपोर्ट के चलते बैकफुट पर भगवंत मान
शुरुआत में भगवंत मान पूरी तरह से अकेले नहीं थे। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री का बचाव किया और इस विवाद को लेकर विपक्ष पर हमला बोला। वहीं, गुरुग्राम पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद सरकार की रणनीति को झटका लगा। पार्टी के भीतर कई नेता निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि निजी फोरेंसिक रिपोर्टों पर भरोसा करना उल्टा साबित हुआ है।
आम आदमी पार्टी के एक पदाधिकारी ने स्वीकार किया कि फॉरेंसिंक रिपोर्ट ही सबसे बड़ी खबर बन गई। विवाद सुलधाने के बजाए इसने इसे और लंबा खींच दिया और विपक्ष को एक नया राजनीतिक मुद्दा दे दिया। आम आदमी पार्टी इसके बाद से सावधान हो गई और अब यह सावधानी धीरे-धीरे भगवंत मान से राजनीतिक दूरी में तब्दील हो गई। हालांकि, भगवंत मान सार्वजनिक रूप से अपने आलोचकों का सामना करते रहे, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से कोई ठोस सक्रियता नहीं दिखाई दी। मंत्री से लेकर सरकार के का कोई भी प्रतिनिधि उनका बचाव करता नहीं दिख रहा है।
कैसा रहा पूरा घटनाक्रम
आम आदमी पार्टी के एक नेता ने कहा, “जिस दिन अकाल तख्त ने निर्देश जारी किया, उसी दिन भगवंत मान ने एक वीडियो संदेश जारी कर अकाल तख्त जत्थेदार पर अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने इस वीडियो को X पर दोबारा पोस्ट किया, जैसा कि अधिकांश AAP विधायकों और मंत्रियों ने भी किया। जब फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश की गई, तो चीमा ने मीडिया को संबोधित किया। वहीं फॉरेंसिक रिपोर्ट विवाद के उलटा पड़ने के बाद, मान को मामला खुद ही संभालना पड़ा।”
आप नेता ने कहा, “उन्होंने एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कोई और था जिसने उन्हीं की तरह दिखने वाला मास्क पहना हुआ था। केजरीवाल ने फिर से मान की मीडिया कॉन्फ्रेंस को दोबारा पोस्ट करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आ गई है।”
विपक्ष ने भगवंत मान की आलोचना की
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने मान पर मुख्यमंत्री पद की प्रतिष्ठा धूमिल करने का आरोप लगाया और अकाल तख्त के निर्देश के बाद उनके इस्तीफे की मांग की। वारिंग ने कहा, “मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। यह सब मुख्यमंत्री पद के लिए शोभा नहीं देता।” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार अपने रुख को लेकर आश्वस्त थी तो उसने निजी फोरेंसिक रिपोर्टों पर भरोसा क्यों किया। दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल ने सरकार पर मनगढ़ंत सबूतों के माध्यम से जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि घटनाक्रम ने सिख धार्मिक संगठनों द्वारा उठाई गई चिंताओं को सही साबित किया है।
हालांकि, आम आदमी पार्टी के भीतर तात्कालिक चिंता बयानबाजी से ज़्यादा राजनीतिक है। कई सिख विधायक निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि अकाल तख्त के निर्देश ने उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्रों में असहज स्थिति में डाल दिया है। एक आप विधायक ने कहा, “अपवित्रता विरोधी कानून को लेकर सभी AAP विधायकों और मंत्रियों को जारी किया गया समन एक बड़ी बात है। मान को खुद समन नहीं भेजा गया है। वह 117 सदस्यीय विधानसभा के इकलौते सदस्य हैं, जिन्हें 29 जून को अकाल तख्त के सामने पेश होने के लिए नहीं कहा गया है।”
आम आदमी पार्टी के लिए दुविधा
इसी दुविधा के चलते भगवंत मान ने निर्धारित पेशी से एक दिन पहले रविवार को सभी विधायकों और मंत्रियों को अमृतसर बुलाया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में नेतृत्व की प्रतिक्रिया को अंतिम रूप देने और यह तय करने की संभावना है कि क्या विधायकों को सामूहिक रूप से अकाल तख्त के समक्ष पेश होना चाहिए। अकाल तख्त ने सिखों को सीएम भगवंत मान का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्देश दिया है, इसलिए सोमवार की कार्यवाही में मान के स्वयं उपस्थित होने की संभावना नहीं है। हालांकि, विधायकों और मंत्रियों को उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
इस समन के कई निहितार्थ हो सकते हैं। अगर आम आदमी पार्टी के विधायक उपस्थित होते हैं, तो इसे सत्ताधारी दल और सिख धार्मिक संस्था के बीच तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। यदि वे अनुपस्थित रहते हैं, तो उन्हें टकराव का समर्थन करने के तौर पर भी देखा जा सकता है। इसको लेकर आम आदमी पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि यह पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है।
अमृतसर में होंगे केजरीवाल
दोनों ही स्थिति में भगवंत मान इस संकट के केंद्र में बने हुए हैं। विडंबना यह है कि उन्होंने ही खुद को पंजाब में आम आदमी पार्टी का निर्विवाद राजनीतिक चेहरा बताया है। चुनाव प्रचार का नेतृत्व करने से लेकर प्रमुख योजनाओं की घोषणा तक, वे पार्टी की सरकार का पर्याय बन गए हैं। कुछ ही दिन पहले केजरीवाल ने उन्हें 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था।
केजरीवाल पार्टी के तीन दिवसीय शिव संध्या जनसंपर्क कार्यक्रम के लिए पंजाब में हैं। उनके रविवार को अमृतसर में विधायकों की बैठक में भी शामिल होने की उम्मीद है। यह देखना होगा कि क्या उनकी उपस्थिति भगवंत मान के साथ स्पष्ट राजनीतिक एकजुटता का सार्वजनिक प्रदर्शन साबित होती है या नहीं।
आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए अब चुनौती सिर्फ एक कथित वीडियो को लेकर विवाद को सुलझाने या फोरेंसिक रिपोर्टों पर आधारित FIR का जवाब देने तक सीमित नहीं रह गई है। अब चुनौती अपने विधायकों को यह भरोसा दिलाना है, कि पार्टी के पास पंजाब की सर्वोच्च सिख धार्मिक संस्था से जुड़े इस अभूतपूर्व टकराव से निपटने के लिए एक सुसंगत राजनीतिक रणनीति है।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आपत्तिजनक वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने खुद कहा था कि वह फर्जी है और उसे छेड़छाड़ करके बनाया गया है। अब इसी मामले में गुरुग्राम की पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने ही शिकायत दर्ज कराई है। पढ़िए पूरी खबर…
