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भागलपुर: JLN मेडिकल कालेज अस्पताल के डाक्टर्स का N-95 मास्क और PPI सुरक्षा किट के बिना ड्यूटी करने से इंकार

जवाहरलाल नेहरू भागलपुर मेडिकल कालेज अस्पताल का कहना है कि जान जोखिम में डाल हम ड्यूटी नहीं कर सकते हैं। सुरक्षा किट का इंतजाम हो जाने पर ही हम ड्यूटी करने तैयार हैं।

जूनियर डाक्टरों के दस्तखत युक्त अधीक्षक को दिया आवेदन।

एक तरफ कोरोना संक्रमण के पॉजिटिव मामले बिहार में बढ़कर 15 हो गए हैं जिनमें एक की मौत हो चुकी है। वहीं जवाहरलाल नेहरू भागलपुर मेडिकल कालेज अस्पताल के पृथक वार्ड में 22 मरीज भर्ती हैं जिनमें छह पॉजिटिव है। बावजूद इलाज करने वाले डाक्टरों को एन-75 मास्क और सुरक्षा किट पीपीई अबतक मुहैया नहीं कराई गई है। जूनियर डाक्टरों के समूह ने सुरक्षा किट के बगैर ड्यूटी करने से साफ इंकार कर दिया है।

अधीक्षक को सोमवार को लिखित तौर पर दिए आवेदन में इन लोगों ने लिखा है कि जान जोखिम में डाल हम ड्यूटी नहीं कर सकते हैं। सुरक्षा किट का इंतजाम हो जाने पर ही हम ड्यूटी करने तैयार हैं। फिर भी स्वास्थ्य महकमा के कानों पर जूं नहीं रेंग रही और जूनियर डॉक्टर की जान सांसत में पड़ी है। अधीक्षक को दिए आवेदन पर दो दर्जन से ज्यादा डाक्टरों के दस्तखत हैं। हस्ताक्षर करने वालों में वे भी हैं जिनका ड्यूटी रोस्टर एक अप्रैल से सात अप्रैल तक का अधीक्षक आरसी मंडल ने निकाला है और इन्हें ड्यूटी करने को कहा है।

ऐसा तुगलकी आदेश इससे पहले पत्रांक 1335 दिनांक 24 मार्च 2020 को भी अधीक्षक निकाल चुके है। जूनियर डॉक्टर परेशान और पेशोपेश में है। उन्हें आदेश निकाल कर दो टूक कह दिया गया कि एन-95 मास्क और पीपीई ग्लब्स नहीं दिए जाएंगे और इसके पहने बगैर ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी करनी पड़ेगी।

साथ ही धमकी भरे लहजे में कहा गया कि ड्यूटी न करने वालों के नाम बिहार स्वास्थ्य महकमा के प्रधान सचिव को भेजा जाएगा। इसलिए रोस्टर के मुताबिक अपनी ड्यूटी करे।अपने आदेश में उन्होंने भारतीय चिकित्सा रिचर्स परिषद (आईसीएमआर) के नियम का हवाला दिया है कि ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में कार्यरत चिकित्सकों को एन-95 मास्क और पीपीई पहनने की आवश्यकता नहीं है। अब तो एन-95 और पीपीई सुरक्षा किट के बगैर पृथक वार्ड में ड्यूटी करने को मजबूर किया जा रहा है।

जबकि जूनियर डाक्टरों के दल ने इस संवाददाता को भारतीय चिकित्सा रिचर्स परिषद के नियमों को दिखाते हुए आदेश को मनमानी करार दिया है। नियम में साफ लिखा है कि केवल डॉक्टरों के लिए ही नहीं जो कर्मचारी ओपीडी सेवा में कार्यरत है, उनके लिए भी एन-95 मास्क और ग्लब्स पहनना अनिवार्य है। साथ ही इमरजेंसी वार्ड में कार्यरत डॉक्टर व कर्मचारियों के लिए सम्पूर्ण पीपीई का उपयोग करना नितांत जरूरी है।

मगर अधीक्षक सुरक्षा कवच मुहैया कराने के बजाए धमका रहे है। ध्यान रहे कि कोरोना संक्रमण के बाद जेएलएन भागलपुर मेडिकल कालेज अस्पताल के करीब एक सौ जूनियर डाक्टरों ने नियम के तहत रोगियों के इलाज के दौरान सुरक्षा कवच किट की लिखित मांग अधीक्षक से की थी। आवेदन पर सभी के दस्तखत हैं जिसे अधीक्षक ने ठुकरा दिया है और नया ड्यूटी रोस्टर भी बनकर तैयार है। इससे सभी जूनियर डॉक्टर संशय में है कि जान बचाए या नौकरी।

हैरत की बात है कि सरकार के बड़े नुमाइंदे इस मुद्दे पर चुप हैं और एक ही राग अलाप रहे है कि कोरोना को हराना है, जंग जीतनी है। दूसरी तरफ अस्पताल में बने एक सौ विस्तर वाले पृथक वार्ड में 22 मरीज भर्ती है लेकिन वहां लापरवाही का सबब व्याप्त है। मरीज जहां – तहां थूक रहे हैं और खिड़की पर न पर्दे हैं और न खिड़कियां बंद की जाती हैं। नतीजतन संक्रमण वहां काम करने वाले चिकित्सकों, कर्मचारियों और दूसरे वार्ड के मरीजों में फैलने का डर बना है।

इधर सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि अब राज्य के दूर-दराज के लोगों का सैंपल उनके ही जिले में ही संग्रहित कर जांच सेंटर तक भेजा जाएगा। उन्हें मेडिकल कालेज अस्पताल लाने की जरूरत नहीं है। राज्यवासियों की परेशानियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिले के सदर अस्पतालों में जांच के वास्ते नमूने लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही उन्होने कहा कि पटना मेडिकल काॅलज एवं हाॅस्पिटल में आइसोलेशन बेड की संख्या 20 से बढ़ाकर 120 कर दी गई है, ताकि आमलोगों को सुविधा मिल सके। वहीं अभी तक राज्य में कुल 977 नमूनों की जांच हुई है। जिसमें 962 निगेटिव और 15 नमूने पाॅजिटिव पाए गए।

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