दो साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की राह में हैं कई अड़चनें - Bhagalpur District Has A Lot of Problems in Way of Being Smart City of Nation - Jansatta
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दो साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की राह में हैं कई अड़चनें

बिहार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा तीन साल पहले भागलपुर के दौरे पर आए थे। उन्होंने भी पत्रकारों से कहा था कि भागलपुर में स्मार्ट सिटी का काम काफी धीमा है।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की राह में पौने दो साल बाद भी कई अड़चने मौजूद हैं। टेंडर के ऑडिट में आपत्ति है। मुख्य वित्त अधिकारी की अबतक बहाली नहीं हुई है। स्मार्ट कंपनी का खाता नहीं खुला है। ठोस कचरा प्रबंधन व दूसरी योजनाओं पर खर्च का आंकलन नहीं हो पाया है। किसी भी योजना में अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल नहीं किया जा सका है। गुरुवार शाम तक चली स्मार्ट सिटी निदेशक मंडल की बैठक में कई दिक्कतों पर काफी माथापच्ची होती रही। लेकिन कुछ खास तय नहीं हो सका जबकि बीते चार महीने में हुई यह छठी बैठक थी। भागलपुर स्मार्ट सिटी निदेशक मंडल के अध्यक्ष प्रमंडल आयुक्त हैं। कायदे से ऐसी बैठकों में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और बिहार राज्य के नगर विकास महकमा के अधिकारी बतौर प्रतिनिधि भी शरीक होने चाहिए लेकिन ये गैरहाजिर रहे। बैठक की अध्यक्षता आयुक्त राजेश कुमार ने की। भागलपुर के जिलाधीश आदेश तितमारे, एसएसपी मनोज कुमार, नगर निगम के नगर आयुक्त श्याम कुमार मीणा, महापौर सीमा साह, सूचना जनसंपर्क उपनिदेशक बिंदुसार मंडल वगैरह बैठक में मौजूद थे।

यह ध्यान रहे कि बीते तीन महीने पहले ही बिहार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा भागलपुर के दौरे पर आए थे। उन्होंने भी पत्रकारों से बगैर परहेज के कहा था कि भागलपुर में स्मार्ट सिटी का काम काफी धीमा है। जबकि केंद सरकार ने पौने दो साल पहले यानी अप्रैल 2016 में ही भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की हुई है। गुरुवार को हुई बैठक में भी उन्हीं मुद्दों पर बातें होती रहीं जो मुद्दे पहली बैठक के थे। इस बार भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका। बैठक के कागजों का अध्ययन करने वाले एक अधिकारी के मुताबिक, अबतक एक करोड़ 41 लाख रुपए इस मद में आए हैं जिनमें से लाखों रुपए साइन बोर्ड, ग्लोसाइन बोर्ड, एक चौराहे पर स्वचालित ट्रैफिक सिग्नल जैसे फिलहाल गैरजरूरी कामों पर खर्च किए जा चुके हैं। मालूम हो कि भागलपुर का ट्रैफिक सिस्टम एकदम चौपट है और जाम की परेशानी से लोग बेहद परेशान हैं।

बताते हैं कि यातायात समस्या से निजात पाने के लिए 19 से 22 फरवरी को मध्यप्रदेश के भोपाल में एक सेमिनार होने वाला है। इसमें देश के बड़े शहरों के यातायात नियंत्रण के माहिर गुर सिखाए जाएंगे और ट्रैफिक कंट्रोल के तरीके बताए जाएंगी। इस सेमिनार में एसपी व डीएसपी स्तर के अधिकारी को शरीक होने को कहा गया है। पुलिस महानिदेशक ने आईजी प्रशिक्षण की मार्फत भागलपुर के आईजी व डीआईजी को इस बाबत पत्र भेज सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए सक्षम अधिकारी को भेजने का अनुरोध किया है। इसमें बिहार के पांच शहर शामिल किए गए हैं जिनमें पटना, गया, भागलपुर, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर हैं।

बता दें कि भागलपुर में हुई बैठक में शहर में तीन फ्लाई ओवर के निर्माण, गंगा नदी किनारे बरारी से बूढ़ानाथ तक रिवर फ्रंट बनाने, गुजरात की तरह बस पड़ाव बनाने, दो मंजिला टॉउन हॉल का निर्माण, सड़कों पर एलईडी लाइट लगाने, शहर की सड़कों की निगरानी करने के लिए सीसीटीबी कैमरे लगाने, बैटरी चालित बसें चलाने, बॉयो टॉयलेट, स्मार्ट सड़क बनाने जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। भागलपुर को स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्मार्ट बनाने के लिए होना तो बहुत कुछ है। लेकिन कायदे से छह बैठकों के बाद भी कुछ नहीं हो सका है। अगली बैठक तीन हफ्ते बाद होनी है। शायद उसमें कोई कारगर और असरदार निर्णय लिया जा सकेगा, ऐसी उम्मीद बैठक में हिस्सा लेने वालों ने जताई है।

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