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PAN के फर्जीवाड़े से सावधान: किराये पर रहता था शख्स, बना दिया 13 कंपनियों का डायरेक्टर, आयकर के नोटिस से उड़ी नींद

दिल्ली के एक कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इकॉनोमिक ऑफेंसेस विंग (ईओडब्लू) को आदेश देते हुए इस मामले में एक्शन लेने को कहा है और साथ ही कोर्ट ने ईओडब्लू को यह भी आदेश दिया है कि वह अपनी रिपोर्ट 1 सितंबर तक पेश करे।

तस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दिल्ली में रहकर हर महीने 25 हजार रुपए कमाने वाले 27 वर्षीय अनुज कुमार श्रीवास्तव के साथ एक ऐसा वाकया हुआ है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान हो जाएगा। एक फार्मा कंपनी के साथ एग्जीक्यूटिव सेल्स के तौर पर काम करने वाले अनुज दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में रहते हैं। कुछ महीनों पहले ही अनुज को यह पता चला कि वह 13 कंपनियों के डायरेक्टर हैं और उन्होंने करीब 20 करोड़ रुपए का लेन-देन किया है और जिसमें से 61 लाख रुपए की डील हॉन्ग कॉन्ग बेस्ड एक कंपनी के साथ हुई है। यह जानकर अनुज काफी हैरान हुए। दरअसल, यह मामला है पैन फर्जीवाड़े का।

इस साल जनवरी में अनुज को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नोटिस जारी किया था। अनुज को जनवरी में आईटी विभाग के करीब तीन नोटिस आए थे। शुरू में उन्होंने इन सभी नोटिस को ये सोचकर नजरअंदाज किया कि हो सकता है कि गलती से ये उन्हें भेज दिया गया हो। अनुज का कहना है, ‘आईटी के नोटिस में यह कहा गया था कि 23 अप्रैल 2015 में मेरे पैन कार्ड का इस्तेमाल करते हुए एक लेनदेन किया गया था, जिसमें 61.37 लाख रुपए मैक्सकार्ट इम्पैक्स कंपनी से मॉन्ग कॉक रोड के ब्रिज वे टावर स्थित डायनामिक टेलिकॉम ट्रेडिंग लिमिटेड को भेजे गए थे।’ अनुज के मुताबिक उन्हें आईटी विभाग की तरफ से कॉल भी आया।

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मामला गंभीर होता देख अनुज ने फरवरी में दिल्ली पुलिस और इन्फोर्समेंट डायरेक्टर को शिकायत दर्ज कराई। अनुज ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके पैन नंबर को बिना उनकी जानकारी के बोगस कंपनियों के द्वारा इस्तेमाल किया गया है और इन कंपनियों ने बड़े स्तर पर विदेशों में स्थित कंपनियों के साथ लेनदेन किया है। फरवरी में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद 31 जुलाई को अनुज को इस मामले में थोड़ी राहत मिली है।

दिल्ली के एक कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इकॉनोमिक ऑफेंसेस विंग (ईओडब्लू) को आदेश देते हुए इस मामले में एक्शन लेने को कहा है और साथ ही कोर्ट ने ईओडब्लू को यह भी आदेश दिया है कि वह अपनी रिपोर्ट 1 सितंबर तक पेश करे। ईओडब्लू के अधिकारी का कहना है, ‘हमने शुरुआत में इस मामले को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेज दिया था, क्योंकि हमें लगा था कि यह उनसे संबंधित मामला है, लेकिन अब कोर्ट ने हमें इस मामले में जांच करने का आदेश दिया है।’

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