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इन्वेस्टमेंट कंपनी ने राहुल द्रविड़, प्रकाश पादुकोण, साइना नेहवाल समेत 800 को लगाया चूना

कर्नाटक में पोंजी स्कीम के जरिये खेल की दुनिया से जुड़ी मशहूर हस्तियों समेत 800 से ज्यादा निवेशकों को 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया गया है। पुलिस ने विक्रम इन्वेस्टमेंट कंपनी के प्रमुख और एक खेल पत्रकार समेत अन्य को गिरफ्तार किया है।

राहुल द्रविड़ और साइना नेहवाल। (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित एक इन्वेस्टमेंट कंपनी ने दिग्गज खिलाड़ियों समेत सैकड़ों लोगों को पोंजी स्कीम के तहत चूना लगाया है। विक्रम इन्वेस्टमेंट कंपनी नामक फर्म ने राहुल द्रविड़, साइना नेहवाल और प्रकाश पादुकोण जैसे लोगों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी की है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस कंपनी ने 800 से ज्यादा लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई है। शिकार लोगों में खेल के अलावा कला, फिल्म, राजनीति और अर्थ जगत से जुड़ी हस्तियां भी शामिल हैं। ‘न्यूज 18’ के अनुसार, पुलिस ने कंपनी के मालिक राघवेंद्र श्रीनाथ के साथ एजेंट के तौर पर काम करने वाले नरसिम्हामूर्ति, केसी. नागराज और प्रह्लाद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में निवेशकों के नामों का खुलासा किया है। जांच अधिकारी बैंक खातों की छानबीन में जुटे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि गिरोह ने निवेशकों को 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया है। फिलहाल दस्तावेज की जांच-पड़ताल की जा रही है। इस बीच, स्थानीय अदालत ने पोंजी स्कीम चलाने वाले आरोपियों को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

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गिरफ्तार खेल पत्रकार की भूमिका थी अहम: पोंजी स्कीम रैकेट में बेंगलुरु के एक जानेमाने खेल पत्रकार सूत्रम सुरेश को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरेश खेल से जुड़ी हस्तियों को पोंजी स्कीम में निवेश करने के लिए प्रेरित करता था। उसके झांसे में आकर कई खिलाड़ियों द्वारा विक्रम इन्वेस्टमेंट कंपनी में निवेश करने की आशंका है। कंपनी ने निवेशकों को 40 फीसद तक का रिटर्न देने का वादा किया था। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि कई निवेशक ज्यादा रिटर्न की लालच में कंपनी में निवेश किया था। बता दें कि पश्चिम बंगाल में सारधा चिटफंड का मामला सामने आने के बाद सरकार इसको लेकर सतर्क हुई थी। वर्ष 2016 में संसदीय समिति ने पोंजी स्कीम से प्राप्त राशि के गलत उपयोग पर अंकुश लगाने की सिफारिश की थी। समिति ने सरकार से चिटफंड को लेकर उपयुक्त कानून लाने की भी सिफारिश की थी। वित्त मामलों पर संसद की स्थाई समिति ने ऐसी कंपनियों/संस्थाओं के खिलाफ समयबद्ध कठोर कार्रवाई करने की भी मांग की थी। उस वक्त सरकार ने नियामक संस्था सेबी द्वारा इस बाबत आदेश देने की जानकारी दी थी। हालांकि, इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में पोंजी स्कीम के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने का धंधा पूरी तरह से बंद नहीं हो सका है।

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