पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 27 लाख लोगों की अपील पर सुनवाई के लिए 19 न्यायाधिकरणों की बैठक होनी है। सूत्रों के मुताबिक मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए 19 न्यायाधिकरण जल्द काम शुरू करेंगे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस मामले में 7 लाख से ज्यादा अपीलें दायर हो चुकी हैं। इस सबके बीच जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं वो सभी परेशान हैं।

इनमें से एक 87 वर्षीय मनमथा नाथ भौमिक कोलकाता के पास जोका स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान के बाहर खड़े होकर अपने सवालों के जवाब खोज रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “मतदाता सूची से मेरा नाम हटा दिया गया था और बूथ लेवल ऑफिसर ने मेरे बेटे को फोन करके बताया कि मुझे आज यहां आना होगा। मैं बहुत चिंतित हूं। कोई भी इस डर को नहीं समझता अगर मुझे बांग्लादेश वापस भेज दिया गया तो क्या होगा?” उनकी आवाज भर्रा जाती है और आंसू बहने लगते हैं। सोमवार को भी भौमिक को कोई जवाब नहीं मिला। गार्डों ने यह कहकर उसे वापस भेज दिया कि काम शुरू नहीं हुआ है।

भौमिक ने बताया कि उनका परिवार 1959 में बांग्लादेश से भारत आया था। उनके परिवार के आगमन पर मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया नागरिकता प्रमाण पत्र भौमिक के पास है। उन्होंने सेवानिवृत्ति से पहले कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट में 40 वर्षों से अधिक समय तक काम किया, प्राधिकरण से पेंशन प्राप्त करते हैं और लगभग आधी सदी से दक्षिण 24 परगना जिले के बेहाला पुरबा से मतदाता रहे हैं।

19 न्यायाधीशों में से 16 ने काम शुरू कर दिया

सोमवार को मीडिया से बात करते हुए, बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने कहा, “हमारे अतिरिक्त सीईओ विभू गोयल संस्थान में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 19 न्यायाधीशों में से 16 ने आज से काम शुरू कर दिया है।” प्राप्त आवेदनों की संख्या के बारे में अग्रवाल ने कहा, “हमारे पास अभी इससे संबंधित डैशबोर्ड नहीं है। दो-तीन दिनों में जब काम सुव्यवस्थित हो जाएगा और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार हो जाएगी, तभी हम बता पाएंगे कि ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलाकर कितने आवेदन जमा किए गए हैं।”

मतदाताओं के लिए अस्थायी वेटिंग रूम बनाया गया

अस्थायी न्यायाधिकरण कार्यालय के ठीक बगल में रद्द किए गए मतदाताओं के लिए अस्थायी वेटिंग रूम बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग ने परिसर में एक बड़ा तंबू लगाया है और जेसीबी मशीनों से ज़मीन समतल की जा रही है। एक अलग वेटिंग रूम बनाया जा रहा है जिसमें एक समय में 500 लोग बैठ सकेंगे। अंतिम समय में आवश्यक दस्तावेज़ों के लिए ज़ेरॉक्स मशीनों के साथ-साथ पंखे और पीने के पानी के डिस्पेंसर भी मंगवाए गए हैं।

पहले यह उम्मीद थी कि जिन लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें न्यायाधिकरणों के समक्ष अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। अब चुनाव आयोग ने मतदाताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने आवेदन ऑनलाइन जमा करें या फिर अपने जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्ट्रेट कार्यालय में जाकर व्यक्तिगत रूप से आवेदन जमा करें।

मुर्शिदाबाद के उन छह मजदूरों की दास्तां जिन्हें बताया गया ‘बाहरी’

 पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में अपने कच्चे घर के बाहर हाथ में दस्तावेजों से भरी प्लास्टिक की फाइल थामे खड़े 34 वर्षीय मीनारुल ने कहा कि इस बार वह सिर्फ वोट डालने मतदान केंद्र नहीं जाएंगे, बल्कि उनसे ‘छीन लिए गए’ अधिकार यानी भारतीय होने का हक वापस लेने जाएंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें