पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी चुनावी रणनीति को काफी मजबूत और आधुनिक बना लिया है। पिछले करीब 10 महीनों में पार्टी ने “डिसेंट्रलाइज्ड डिजिटल सिस्टम” यानी बिखरे हुए लेकिन आपस में जुड़े डिजिटल नेटवर्क पर जोर दिया है। इसका मकसद बीजेपी के “सेंट्रलाइज्ड डिजिटल मैसेजिंग” यानी एक जगह से नियंत्रित प्रचार का मुकाबला करना है। साथ ही टीएमसी जमीन और इंटरनेट दोनों पर अपनी कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार तेज कर रही है।
टीएमसी की रणनीति का मुख्य संदेश है— “बंगाल से प्यार बनाम बंगाल पर कब्जा”। इसी सोच के आधार पर पार्टी ने कई लोकल कैंपेन तैयार किए हैं, जैसे “अगर वे सत्ता में आए तो क्या होगा?” और “बांग्ला विरोधी”। इन सभी को बड़े स्तर पर फैलाने के लिए पार्टी ने एक मजबूत व्हाट्सअप नेटवर्क बनाया है, जिसमें 1.5 लाख से ज्यादा ग्रुप और 1 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हैं।
पार्टी के ऐप में रोजाना 1.3 लाख एक्टिव यूजर्स
इसके अलावा, टीएमसी ने “दीदीर दूत” नाम का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है, जो अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ था। इस ऐप को अब तक 18 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसमें रोजाना करीब 1.3 लाख एक्टिव यूजर्स और हर महीने 7.3 लाख यूजर्स सक्रिय रहते हैं। यह ऐप कार्यकर्ताओं को टास्क देता है, अपडेट्स देता है और क्विज व गेम जैसी सुविधाओं के जरिए उन्हें लगातार सक्रिय रखता है।
टीएमसी के आईटी सेल प्रमुख देबांग्शु भट्टाचार्य का कहना है कि उनकी रणनीति साफ है— “हम सच बताते हैं और बीजेपी झूठ फैलाती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का डिजिटल प्रचार काफी हद तक बंगाल के बाहर से संचालित होता है और बॉट्स की तरह काम करता है।
पार्टी का डिजिटल सिस्टम रोजाना 10,000 से ज्यादा रील और छोटे वीडियो तैयार करता है। इनमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के भाषण, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की कहानियां और विपक्ष के आरोपों का जवाब शामिल होता है। यह कंटेंट सोशल मीडिया, वॉलंटियर्स और इन्फ्लुएंसर्स के जरिए तेजी से फैलाया जाता है।
टीएमसी के अनुसार, उनकी डिजिटल रणनीति सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि भावनात्मक भी है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी बंगाल को “घुसपैठिया” जैसे शब्दों से बदनाम करने की कोशिश करती है, जबकि टीएमसी “बंगाली अस्मिता” यानी पहचान और सम्मान को आगे रखती है।
संगठन स्तर पर “मैं बंगाल का डिजिटल योद्धा हूं।” नाम का वॉलंटियर नेटवर्क है, जिसमें 1.6 लाख से ज्यादा सदस्य हैं। इसके अलावा 5,000 से ज्यादा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और 50 से ज्यादा डिजिटल प्रवक्ता भी जुड़े हैं। यह पूरा नेटवर्क मिलकर रोजाना 50 करोड़ से ज्यादा डिजिटल इम्प्रेशन बनाता है।
टीएमसी अपनी योजनाओं, खासकर “लक्ष्मी का भंडार” योजना को भी प्रमुखता से प्रचारित कर रही है, जिसमें महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। पार्टी का दावा है कि उनकी नीतियों की नकल विपक्ष भी कर रहा है।
कुल मिलाकर, टीएमसी की रणनीति में डिजिटल ताकत, तेज रफ्तार और भावनात्मक जुड़ाव का मिश्रण है, जो इस चुनाव को सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि पहचान और संस्कृति की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है।
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पश्चिम बंगाल में चुनावों की घोषणा के बाद से लगातार राज्य का सियासी पारा चढ़ता ही जा रहा है। राज्य में अपनी पार्टी बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी 10 से 12 रैलियां और रोड शो करेंगे। बीजेपी के शीर्ष सूत्र ने द इंंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर रैलियां और रोड शो करेंगे। रामनवमी के बाद बीजेपी का कैंपेन और तेज होने वाला है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
