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शपथ ग्रहण से पहले ही बोले कुमारस्वामी- कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार चलाना बड़ी चुनौती

बुधवार (23 मई) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री की शपथ लेने पहले ही जनता दल (सेक्युलर) के एचडी कुमार स्वामी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली सरकार के सुचारू रूप से चल पाने की आशंकाओं से इनकार नहीं किया है। मंगलवार (22 मई) को कुमार स्वामी ने कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार को पांच वर्षों तक चला ले जाने को बड़ी चुनौती माना।

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के साथ कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री एचडी कुमारस्‍वामी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी। (Photo: PTI)

बुधवार (23 मई) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री की शपथ लेने पहले ही जनता दल (सेक्युलर) के एचडी कुमार स्वामी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली सरकार के सुचारू रूप से चल पाने की आशंकाओं से इनकार नहीं किया है। मंगलवार (22 मई) को कुमार स्वामी ने कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार को पांच वर्षों तक चला ले जाने को बड़ी चुनौती माना। कुमारस्वामी राज्य के आदि शंकराचार्य द्वारा पहला मठ स्थापित करने वाले स्थल श्रृंगेरी पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपनी बात कही। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुमारस्वामी ने कहा- ”मेरी जिंदगी की यह बड़ी चुनौती है। मैं यह अपेक्षा नहीं कर रहा कि मैं आसानी से मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर पाऊंगा।” उन्होंने कहा- ”केवल मुझे नहीं, लोगों को भी संदेह है, राज्य के लोगों को भी संदेह है कि यह सरकार सुचारू ढंग से काम कर पाएगी या नहीं लेकिन मुझे भरोसा है कि शारदाम्बे और श्रृंगेरी जगदगुरू (शंकराचार्य) की कृपा से सबकुछ सुचारू रूप से होगा।”

कुमारस्वामी के साथ कांग्रेस के जी परमेश्वर उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सरकार के बहुमत साबित कर देने के बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। बता दें कि बुधवार को कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मायावती, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, चंद्रबाबू नायडू, के चंद्रशेखर राव और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी हिस्सा लेंगे।

बता दें कि सोमवार (21 मई) को कुमारस्वामी ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। कहा जा रहा कि इस मुलाकात में सरकार की स्थिरता को लेकर कुमारस्वामी की कांग्रेस आलाकमान से बात हुई थी। इसके अलावा मंत्रीमंडल का गठन और विभागों के बंटवारे को लेकर बातचीत हुई थी। यह भी कहा जा रहा है कि दोनों पार्टियों के बीची तीन पदों पर पेंच फंसा हुआ है, इनमें से एक विधानसभा अध्यक्ष और जो उप मुख्यमंत्री को लेकर हैं।

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