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निर्भया ने कहा था- जिन्होंने मेरे साथ ये किया है, उन्हें छोड़ना मत, मामले की जांच कर रही अफसर ने खोला राज

पुलिस अफसर छाया शर्मा 100 लोगों की टीम के साथ इस मामले की जांच कर रही थीं।

16 दिसंबर, 2012 की रात 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ दक्षिणी दिल्ली में एक चलती बस में जघन्य तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में चलती बस में एक पैरामेडिकल स्टूडेंट से गैंगरेप ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। लेकिन इस मामले की जांच कर रही पुलिस अफसर छाया शर्मा से निर्भया ने कहा था-जिन्होंने मेरे साथ ये किया है, उन्हें छोड़िएगा नहीं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखने का आदेश दिया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस अफसर ने निर्भया द्वारा दिए गए बयानों के लिए उसे मन ही मन धन्यवाद दिया। तीन जजों की बेंच ने कहा, दिल्ली पुलिस ने जो सबूत पेश किए हैं, उनमें कोई खामी नहीं है। अब नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन के साथ काम कर रहीं छाया कहती हैं, अगर हम दोषियों को सजा दिलाने में कामयाब रहे, तो यह निर्भया के कारण हुआ। उसके लगातार दिए बयानों के कारण ही यह संभव हो पाया।

वह बताती हैं पहली बार वह 23 साल की निर्भया से अस्पताल में मिली थीं, उस वक्त पर जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही थी। जजों ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान निर्भया से गैंगरेप को हैवानियत बताया था। पुलिस अफसर ने बताया वह बिल्कुल नहीं डरी, जैसा अन्य रेप पीड़ित डरते हैं। उसका एटीट्यूड बहुत पॉजिटिव था। निर्भया ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दो मजिस्ट्रेट और डॉक्टर्स के आगे बयान दिए थे। उसके तीनों बयानों के कारण ही पुलिस को जांच में मदद मिल पाई। हमले के 13 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में निर्भया की मौत हो गई थी। मरने से पहले उसके बयानों को पुलिस ने घोषणापत्र मान लिया था। छाया शर्मा ने कहा, पुलिस के आगे सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि रेपिस्ट महिला को नहीं जानते थे। हमारे लिए चीजें बहुत मुश्किल थीं।

हमें जीरो से केस को शुरू करना पड़ा। टीम को जो शुरुआती सबूत मिले थे, वे थे कि बस की लाल सीटें थीं और पीले परदे थे। उन्होंने कहा, हमारे लिए बस को ढूंढना बहुत मुश्किल था। हमने करीब 300 बसों को शॉर्टलिस्ट किया था और टीम को जो सबूत मिले, वो उसपर काम करती रही। छाया शर्मा ने बताया कि हमारी टीम में 100 पुरुष और महिलाएं थीं। हमने पाया कि जिस बर्बरता के साथ दोषियों ने इस घृणित काम को अंजाम दिया, उससे पता चलता है कि वे इलाके से वाकिफ थे। पुलिस ने सीसीटीवी भी खंगाला, लेकिन वहां से भी उन्हें कुछ ज्यादा पता नहीं चला। लेकिन तब उन्हें सफेद रंग की बस पर यादव लिखा दिखा, जिससे उनकी जांच का दायरा सीमित हो गया। शर्मा ने कहा कि हमने एक के बाद एक सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। हमले के 18 घंटे में ही पुलिस ने बस के ड्राइवर राम सिंह को अरेस्ट किया। पूछताछ के बाद अन्य भी गिरफ्त में आ गए।

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