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कैराना उपचुनाव से पहले मायावती पर सीबीआई जांच का खतरा, 21 चीनी मिलों की बिक्री में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

मायावती के शासनकाल में सार्वजनिक क्षेत्र की 21 चीनी मिलों को बेचा गया था। इससे सरकार को 1,179 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही गई है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दिया था। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती की भी मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

बसपा प्रमुख मायावती। (एक्सप्रेस फोटो)

कैराना लोकसभा उपचुनाव से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चीनी मिलों की बिक्री मामले में उनके खिलाफ सीबीआई का शिकंजा कस सकता है। मायावती के शासनकाल के दौरान वर्ष 2010-11 में उत्तर प्रदेश सरकार ने 21 सरकारी चीनी मिलों में विनिवेश को हरी झंडी दी थी। इससे रज्य सरकार को कथित तौर पर 1,179 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अब सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ भी जांच हो सकती है। मायावती 2007-12 के तक प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी रहे नसीमुद्दीन सिद्दिकी ने दावा किया था कि चीनी मिलों को तत्कालीन सीएम मायावती और बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के निर्देशों के बाद बेचा गया था। वहीं, मायावती ने दावा किया था कि चीनी मिलों की बिक्री को लेकर तस्लीमुद्दीन ने आदेश जारी किया था। तस्लीमुद्दीन को बाद में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीबीआई के हवाले किया मामला: योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ‘चीनी मिल घोटाले’ की सीबीआई से जांच कराने की घोषणा की थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले को 12 अप्रैल को औपचारिक तौर पर सीबीआई के हवाले कर दिया था। प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने इसकी जानकारी दी। उनके अनुसार, चीनी मिलों की बिक्री में कुछ गड़बड़ियां पाई गई हैं। इसलिए मामले की जांच को सीबीआई के हवाले किया गया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के अनुसार, जांच एजेंसी दस्तावेज की छानबीन शुरू कर दी है और जल्द ही एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी। सीबीआई इस घोटाले में राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों और व्यवसायियों की संलिप्तता की भी जांच कर रही है। इस बाबत नवंबर, 2017 में लखनऊ के गोमती नगर में दाखिल एफआईआर की प्रति सीबीआई को मुहैया कराई जा चुकी है। उत्तर प्रदेश द्वारा दर्ज एफआईआर में सरकारी चीनी मिलों को खरीदने वाली नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और गिराशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का नाम शामिल है। सूत्रों का कहना है कि ये दोनों कंपनियां फर्जी हैं। तत्कालीन मायावती सरकार पर 21 चीनी मिलों को बाजार दर से कम कीमत पर इन मिलों को बेचने का आरोप है। मुलायम सिंह यादव की सरकार ने भी इन चीनी मिलों को बेचने का प्रयास किया था, लेकिन हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के कारण यह संभव नहीं हो सका था।

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