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2019 के चुनावों से पहले मोदी का ‘किसान कार्ड’, धान के समर्थन मूल्‍य में 200 रुपये की बढ़ोत्‍तरी

सरकार ने किसानों को लुभाने के लिए खरीफ की फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणा की है। खरीफ के मौसम में कुल 14 किस्म की फसलें उगाई जाती हैं। जिनमें सबसे प्रमुख धान है। धान के समर्थन मूल्य में सरकार ने 200 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो। सोर्स- रॉयटर्स

साल 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा दांव चला है। सरकार ने किसानों को लुभाने के लिए खरीफ की फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणा की है। खरीफ के मौसम में कुल 14 किस्म की फसलें उगाई जाती हैं। जिनमें सबसे प्रमुख धान है। धान के समर्थन मूल्य में सरकार ने 200 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया है। इससे देश के बड़े हिस्से में खेती करने वाले किसानों को मुनाफा होगा। वैसे बता दें कि देश में करीब 25 करोड़ लोग खेती-किसानी के कामों में लगे हुए हैं। जबकि इस देश में करीब 50 करोड़ लोग कृषि मजदूर के रूप में सीधे तौर पर खेती—किसानी से जुड़े हुए हैं। धान का वर्तमान समर्थन मूल्य इस वक्त 1550 रुपये प्रति क्विंटल है। 200 रुपये की बढ़ोत्तरी होने के बाद अब ये कीमत 1750 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगी।

कैबिनेट ने धान, दाल, मक्का जैसी खऱीफ फसलों के लिए एमएसपी लागत का डेेेेढ़ गुना करने का फैसला लिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत है जिस पर सरकार किसानों का अनाज खरीदती है। किसानों के लिए फसलों पर 50 फीसदी मुनाफा देने के मकसद से इस बार एमएसपी में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी का फैसला लिया गया है। अब अनाज की लागत के आकलन के लिए ए2+एफएल फॉर्मूला अपनाया जाएगा। ए2+एफएल फॉर्मूले के तहत फसल की बुआई पर होने वाले कुल खर्च और परिवार के सदस्यों की मजदूरी शामिल होगी।

धान का समर्थन मूल्य 1550 रुपए से बढ़ाकर 1750 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। धान ए ग्रेड की कीमत 1590 रुपए से बढ़ाकर 1770 प्रति क्विंटल करने का फैसला लिया गया है। सबसे ज्यादा रागी का समर्थन मूल्य 52.5 फीसदी बढ़ाया गया है। ज्वार का समर्थन मूल्य 42 फीसदी, बाजरा का 36.8 फीसदी और मूंग में 25.1 फीसदी बढ़ोत्तरी का फैसला लिया गया है। लेकिन तुअर के समर्थन मूल्य में सिर्फ 4.1 फीसदी और उड़द में 3.7 फीसदी की बढ़त का फैसला लिया गया है।

इसके पहले धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में साल की रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी 155 रुपये प्रति क्विंटल की हुई थी। ये फैसला यूपीए सरकार ने साल 2008-09 में लिया था। ये मोदी सरकार के द्वारा की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (3 जुलाई) को ही कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और नीति आयोग के सदस्यों से मुलाकात की थी। जिसके बाद ये माना जा रहा था कि 2018-19 के लिए नए समर्थन मूल्यों का ऐलान हो सकता है। पीएम मोदी पहले ही अपने लक्ष्य के बारे में बता चुके हैं। उनका मकसद साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना है। आपको बता दें कि हाल ही में एक मैग्ज़ीन को दिए इंटरव्यू में पीएम ने इसके संकेत भी दिए थे।

खेत में काम करता किसान।

भारतीय राजनीति के कई जानकार इसे मोदी सरकार के बड़े मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देख रहे हैं। निकट भविष्य में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में चुनाव होने वाले हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों ही धान का उत्पादन करने वाले राज्य हैं। निश्चित तौर पर इससे सरकार को चुनाव में फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। मोदी सरकार का ये फैसला सीधे तौर पर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई प्रदेशों में सीधा असर दिखाएगा, इन राज्यों में किसानों की संख्या अधिक है और लोकसभा सीटों की भी। ये 2019 के चुनावों में सरकार के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है।

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