Khamenei Barabanki Connection: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई की मौत की खबर से भारत का एक गांव गमगीन है। जब रविवार को अमेरिका और इजराइल के लक्षित हमले में खामेनई की मौत की पुष्टि ईरानी सरकार की तरफ से की गई, तब उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के बदोसराय स्थित किंतुर गांव में गम का माहौल व्याप्त हो गया।

पूर्वज लगभग 150 साल पहले ईरान गए

ऐसी मान्यता है कि खामेनई के गुरु अयातुल्ला खुमैनी का किंतुर से पुश्तैनी रिश्ता था और उनके पूर्वज लगभग 150 साल पहले यहां से ईरान गए थे। हालांकि समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन आज भी यहां के लोग उस वंशावली और उनके इतिहास को याद करते हैं। स्वयं को खुमैनी का वंशज बताने वाले सैयद निहाल अहमद काजमी ने रविवार को बताया कि बाराबंकी जिले के रामनगर में स्थित किंतुर गांव वर्ष 1979 में ईरान में हुई इस्लामी क्रांति के शिल्पी और नेतृत्वकर्ता रहे अयातुल्ला रूहउल्लाह मुसावी खुमैनी का दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्मस्थान था।

उन्होंने बताया कि मुसावी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी और वह वर्ष 1834 में एक धार्मिक यात्रा पर ईरान गए थे, क्योंकि वह स्वतंत्रता सेनानी थे, इसलिए तत्कालीन अंग्रेज हुकूमत ने उन्हें भारत नहीं लौटने दिया। काजमी ने बताया कि उसके बाद मुसावी ईरान के मशहूर शिक्षा केंद्र माने जाने वाले खुमैन शहर में बस गए और वहीं पर उनके पौत्र अयातुल्ला रूहउल्लाह मुसावी खुमैनी की पैदाइश हुई थी।

इंसानियत पर हमला करार दिया

खामेनई ने खुमैनी की शागिर्दी की और उनके निधन के बाद उनकी विरासत को संभाला। काजमी ने अमेरिका और इजराइल के हमले में खामेनई की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए इसे इंसानियत पर हमला करार दिया। काजमी के भतीजे और खुमैनी के प्रपौत्र डॉक्टर सैयद रेहान काजमी ने बताया कि किंतुर से ईरान का गहरा नाता है, क्योंकि यह एक समय ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला रूहउल्लाह मुसावी खुमैनी का पुश्तैनी गांव है।

रेहान ने कहा कि उनके परदादा के शिष्य अयातुल्ला खामेनई की मौत से ईरान के साथ-साथ पूरी दुनिया के मुसलमानों को गहरा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि एक ऐसे रहनुमा को खोना, जो मानवता का संरक्षक था, अपने आप में बहुत बड़ी पीड़ा है। किंतुर वासी सैयद हुसैन जैदी ने खामेनई की मौत पर गम और गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि खामेनई केवल मुसलमानों को नहीं बल्कि पूरी इंसानियत को रास्ता दिखाने वाले शख्स थे।

उन्होंने अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई इस कार्रवाई को कायरना हमला बताते हुए कहा कि हम सभी लोगों से अपील करते हैं कि शांति बनाए रखें। हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है। खामेनई की मौत की खबर फैलते ही किंतुर और उसके आसपास के इलाकों में जगह-जगह दुआ फातिहा किया गया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कई स्थानों पर शोकसभा आयोजित की गई।