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बापू ने हिंदू-मुसलिम एकता के लिए दी जान

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में महात्मा गांधी और इस्लाम विषय पर हुई परिचर्चा में कहा गया कि बापू का मानना था कि देश में स्थायी शांति तब तक नहीं हो सकती जब तक सभी धर्मों के मानने वाले एक दूसरे की आस्था का सम्मान और संयम का पालन नहीं करते।

Author नई दिल्ली | April 2, 2017 1:17 AM
नेताजी ने रेडियो रंगून से 1944 में पहली बार बापू को कहा था ‘राष्ट्रपिता’

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में महात्मा गांधी और इस्लाम विषय पर हुई परिचर्चा में कहा गया कि बापू का मानना था कि देश में स्थायी शांति तब तक नहीं हो सकती जब तक सभी धर्मों के मानने वाले एक दूसरे की आस्था का सम्मान और संयम का पालन नहीं करते। इसमें कहा गया कि हिन्दू मुसलिम एकता के लिए गांधी ने अपनी जान तक दे दी। जामिया के नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कानफ्लिक्ट रेजलूशन सेंटर की ओर से आयोजित व्याख्यान के तहत जर्मनी की हिडलबर्ग यूनिवर्सिटी में इतिहास विभाग की प्रो गीता धर्माचार्य फ्रिक ने कहा कि गांधी कहा करते थे कि अगर हिंदू सोचते हैं कि भारत सिर्फ हिंदुओं का है तो वे दु:स्वपन में हैं। हिंदुस्तान को हिंदू, मुसलमान, इसाई और पारसी सबने सींचा है और सब आपस में मिलकर ही रह सकते हैं। बापू ने मुसलमानों से भी कहा कि इस्लाम के भाईचारे के सिद्धांत के आधार पर वे हिंदुओं से भाईचारे और दोस्ती का रिश्ता रखें।

उन्होंने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना में राष्ट्रपिता ने बहुत ही सक्रिय भूमिका निभाई थी। ब्रिटिश शिक्षा के खिलाफ उनकी बुनियादी शिक्षा की सोच को अमली जामा पहनाने के लिए जामिया सामने आया। जिससे जौहर बंधुओं के अलावा जाकिर हुसैन, मौलाना अबुल कलाम आजाद और मुहम्मद मुजीब जुड़े। इन लोगों से मिलकर बापू ने ब्रिटिश शिक्षा का विकल्प पेश किया। गीता धर्माचार्य ने कहा कि महात्मा गांधी के रामराज्य के सिद्धांत को गलत समझा गया जबकि इससे उनका आशय समाज के सभी लोगों के सुख और शांति के साथ रहने से था, लेकिन साम्प्रदयिक ताकतों ने उसका गलत अर्थ बना कर लोगोें को गुमराह किया।

उन्होंने कहा कि गांधी के स्वराज के सिद्धांत की चार बुनियाद हैं हिंदू-मुसलिम भाईचारा, सत्याग्रह, छुआछूत का अंत और स्वदेशी (खादी) को बढ़ावा। जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा, हिन्दू-मुसलिम एकता स्थापित करने में गांधी जी को अपनी जान की कीमत देनी पड़ी। तत्कालीन योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयद सैयदना हामिद ने कहा कि हिन्दू-मुसलिम एकता की गाांधी जी की कोशिशों को आगे बढ़ाने की आज पहले से भी कहीं ज़्यादा आवश्यकता है। व्याख्यान माला में नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉनफ्लिक्ट रेजलूशन सेंटर की डायरेक्टर और जेएमआई छात्र कल्याण की डीन तसनीम मिनाई ने भी शिरकत की।

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