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मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का भोज राजनैतिक दलों में खास अहमियत रखता है

2015 बिहार विधानसभा चुनाव साथ लड़े महागठबन्धन के साथी इस बार जुदा है। अबकी जद(एकी) इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति भी दही-चूड़ा के भोज के साथ तय करेगा।

Author नई दिल्ली | Updated: January 15, 2020 7:50 PM
दही चूड़ा

बिहार की राजनैतिक फिजां में दही, चूड़ा और चीनी के मिश्रण का भोज काफी मायने रखता है। यह भोज हर साल मकर संक्रांति को राजनीति के माहिर शख्सियतें और दल अपने-अपने हिसाब से आयोजित करते हैं। लेकिन बीते दो साल से राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद के जेल में रहने से इनके घर सन्नाटा पसरा है। इस दफे भी दही-चूड़ा का त्योहार इस घराने में फीका ही रहा। फर्क यह है कि इस दफा दो वजहें और जुट गई है। एक तो राबड़ी देवी की तबियत खराब बताई जा रही है। दूसरी तेजप्रताप और उनकी पत्नी के बीच चल रहा विवाद है।

2015 बिहार विधानसभा चुनाव साथ लड़े महागठबन्धन के साथी इस बार जुदा है। अबकी जद(एकी) इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति भी दही-चूड़ा के भोज के साथ तय करेगा। साथ ही 19 जनवरी को जल-जीवन-हरियाली पर बुलाई मानव श्रृंखला को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को मुस्तैद करना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद भी सात चरणों में प्रदेश का भ्रमण कर लोगों को इसमें शरीक होने का न्यौता दे आए है। मसलन दोहरा मकसद पूरा करना है। इसकी कामयाबी के बहाने केंद्र की मोदी सरकार को पर्यावरण अभियान की सफलता जताना है। जिसने जल-जीवन-हरियाली पर तैयार की जा रही झांकी को गणतंत्र दिवस की परेड में शरीक करने से इंकार कर दिया।

जद(एकी) की ओर से इनके प्रदेश अध्यक्ष विशिष्ट नारायण सिंह ने अपने हार्डिंग पार्क वाले घर पर दही-चूड़ा का भोज 15 जनवरी को आयोजित किया है। मगरसंक्रान्ति इसी रोज मानी जा रही है। जिसमें भाजपा के नेताओं के शरीक होने की उम्मीद है। मगर रामविलास पासवान की लोजपा और खुद भी ऐसे किसी भोज से दूर रहेंगे। इसकी वजह उनके सगे भाई पशुपतिनाथ पारस की हाल ही में हुई मृत्यु बताई जा रही है। उधर भाजपा विधान पार्षद रजनीश कुमार भी अपने आवास पर 15 जनवरी बुधबार को भोज खिलाने के वास्ते तैयारियों में जुटे है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा के मुतानिक कांग्रेस पार्टी की ओर से सदाकत आश्रम में आयोजन होगा।

जानकार बताते हैं कि जनता दल परिवार 1999 से यह आयोजन पटना में करता आ रहा है। तीन साल पहले नाव हादसे की वजह से जद(एकी) ने मकर संक्राति का भोज टाल दिया था। मगर राजद परिवार अपने सुप्रीमो लालू प्रसाद के जेल में बंद होने की वजह से राजद कुनबे में भोज बीते तीन साल से आयोजित नहीं हो रहा है। वैसे लालू प्रसाद मुख्यमंत्री बनने के बाद यानी साल 1990 के बाद से ही दही चूड़ा का भोज अपने आवास पर देते रहे हैं। कांग्रेस भी दही-चूड़ा का आयोजन करती रही है मगर राजद-जद(एकी) के आयोजनों जैसी भव्यता नहीं होती और न ही हरेक साल ऐसे भोज करने का कांग्रेस में रिवाज है।

लोजपा के रामविलास पासवान भी दो साल से 14 जनवरी को पटना में पार्टी दफ्तर में जोर-शोर से दावत का आयोजन करते आ रहे हैं। मगर इस दफा भाई के बीते जुलाई में अकस्मात निधन के सदमे से ये उबर नहीं पाए है। 2015 का बिहार विधान सभा चुनाव महागठबन्धन जीतने के बाद 2016 में दही-चूड़ा के भोज का आयोजन महागठबंधन के अगुवा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के लिए जितना उमंग भरा था, उसके बाद वे दिन अभी तक नहीं लौटे है। यह अलग बात है कि झारखंड में महागठबंधन की सरकार बनने से जेल में बंद लालू प्रसाद को थोड़ा सुकून जरूर दिया है। 2015 महागठबंधन में जद(एकी) भी शामिल थी।

बता दें कि 2016 में 10 सर्कुलर रोड आवास पर लालू परिवार के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शरीक हुए थे। तब छोटे भाई (नीतीश कुमार) को बड़े भाई (लालू प्रसाद) ने दही का टीका लगा महागठबंधन के अटूट होने का संकेत दिया था। मगर यह यकीन छह महीने के अंदर ही भरभरा गया और महागठबंधन टूट गया। इसके बाद से लालू प्रसाद और उनके परिवार की मुश्किलें ज्यादा बढ़ गई हैं। और भाजपा के सुशील मोदी तो करीबन रोजाना प्रेस कांफ्रेंस कर हमले कर रहे है।

महागठबंधन में भी सब अपनी ढपली अपना राग अलापने का तंज भाजपा नेता व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे कसते है। सीटों को लेकर भी रस्साकसी है। तो राजग में भी सब कुछ आसान नहीं है। मगर दही-चुड़ा का भोज सब कुछ ठीक कर देने का रास्ता बन सकता है। यह दही-चूड़ा बिहार में खासकर चुनावी साल में सियासत का खेल बना है।

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