दिल्ली सरकार ने शहर में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए आईटीओ और सराय काले खां के बीच यमुना नदी के किनारे को ‘पत्थर बिछाकर’ मजबूत करने और जल निकासी बुनियादी ढांचे को उन्नत करने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि इस कार्य में तटबंध के कमजोर हिस्सों को मजबूत करना और प्रमुख नालों व ‘मिलेनियम तटबंध’ के किनारे पहुंच मार्गों में सुधार करना शामिल है, ताकि भारी बारिश के दौरान अधिक प्रभावी ढंग से बाढ़ प्रबंधन किया जा सके।
पहुंच मार्गों को मजबूत किया जा रहा
मानसून के दौरान नियमित सफाई और आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए नाला संख्या 12 के किनारे स्थित पहुंच मार्गों को मजबूत किया जा रहा है। इस परियोजना का एक अन्य महत्त्वपूर्ण हिस्सा ‘मिलेनियम तटबंध’ पर भी सक्रिय है, जो दक्षिण दिल्ली के सराय काले खां क्षेत्र के पास यमुना नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है। वह तटबंध बाढ़ को रोकने के लिए एक सुरक्षात्मक अवरोध के रूप में कार्य करता है। वह पहल शहर में बाढ़ प्रबंधन और नदी तट संरक्षण करने वाले दिल्ली सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग (आई एंड एफसी) द्वारा की जा रही है।
कटाव को रोकने के लिए काम चल रहा
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह तटबंध को मजबूत करने और नदी के किनारे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ भविष्य में होने वाले कटाव से क्षेत्र की रक्षा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। अधिकारियों के मुताबिक, ‘मिलेनियम तटबंध’ पर पत्थर बिछाने की प्रक्रिया के माध्यम से मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए काम चल रहा है।
मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि यमुना के किनारे तटबंधों को मजबूत करने और जल निकासी व्यवस्था में सुधार करने से बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन उपायों से जल निकासी व्यवस्था में सुधार होने की संभावना है और मानसून के मौसम में आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव का खतरा कम हो जाएगा।
मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि यमुना के किनारे तटबंधों को मजबूत करने और जल निकासी व्यवस्था में सुधार करने से बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
