बसपा प्रमुख मायावती ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेता सतीश चंद्र मिश्र को बड़ी जिम्मेदारी दी है। सतीश चंद्र मिश्र को उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय का बड़ा चेहरा माना जाता है।

मायावती ने बुधवार को अपने ऑफिशियल X हैंडल पर बताया कि पार्टी के लिए लंबे समय से काम करते आ रहे सीनियर एडवोकेट सतीश चंद्र मिश्र को पार्टी के द्वारा लीगल और मीडिया के काम के साथ-साथ चुनाव आयोग संबंधी मामलों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

मायावती ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान सतीश मिश्रा की भूमिका काफी अहम रहेगी।

मायावती ने कहा, “बीएसपी ने सर्वसमाज में से खासकर ब्राह्मण समाज को भी पार्टी में उनकी 2007 की तरह बीएसपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारी के हिसाब से जब से उम्मीदवार बनाना शुरू किया है, तब से विरोधी पार्टियों में इसको लेकर चर्चा व चिंता है।” उन्होंने कहा कि इस तरह के हथकंडों से बहुजन समाज के लोगों को लगातार सजग व सतर्क रहने की जरूरत है।

कौन हैं सतीश मिश्र?

सतीश चंद्र मिश्र लंबे वक्त से बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। वह बीएसपी के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष और कई बार राज्यसभा के सांसद रहे हैं। कानून और संवैधानिक मामलों में विशेषज्ञता के चलते बसपा उन्हें कई बार अहम जिम्मेदारी देती रही है। इस तरह उनके पास संगठन, सरकार, कानून और चुनावी राजनीति को लेकर अच्छा-खासा अनुभव है।

बीएसपी की सोशल इंजीनियरिंग

मायावती एक बार फिर उत्तर प्रदेश में दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम की सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले के दम पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं। इसी फॉर्मूले के दम पर बसपा को 2007 के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिली थी। सतीश चंद्र मिश्र को लीगल और मीडिया से जुड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की वजह से बीएसपी को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है।

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