Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर से बाबरी ढांचे को लेकर बड़ा बयान दिया। बाराबंकी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोग हैं, जो अवसरवादी रवैया अपनाते हैं। जब संकट आता है तो राम याद आते हैं। बाकी राम को भूल जाते हैं। इसलिए भगवान राम भी उनको भूल चुके हैं।

उन्होंने का कि इन रामद्रोहियों के लिए कोई जगह नहीं बची, जो रामभक्तों पर गोली चला रहे थे। रामकाज में बाधक थे, जो लोग सपना देख रहे हैं बाबरी ढांचे का, उनको बता दे रहे हैं कि कयामत का दिन कभी नहीं आएगा। कयामत के दिन के लिए मत जियो।

सीएम योगी ने कहा कि हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। यहां का कानून मानो, कानून मानोगे, कायदे से रहोगे, तो फायदे में रहोगे। नहीं तो आगे का रास्ता कहां जाता है। अगर कानून कोई तोड़ेगा, तो रास्ता सीधे जहन्नुम की ओर जाता है, कानून तोड़कर कोई जन्नत जाने का सपना देख रहा है, तो यह सपना कभी पूरा नही होने वाला है।

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मुख्यमंत्री ने अपराधियों और उपद्रवियों को नसीहत देते हुए कहा कि कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। कानून कोई तोड़ेगा तो जहन्नुम ही जाओगे। हम लोगों ने कहा था कि राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। बन गया न, वहीं पर मंदिर बना है। उन्होंने कहा कि आज फिर हम कह रहे हैं कि कयामत के दिन तक भी बाबरी मस्जिद के ढांचे का पुनर्निर्माण होना ही नहीं है, जो कयामत के दिन के आने का सपना देख रहे हैं। ऐसे सड़-खप जाएंगे। वो दिन आना ही नहीं है।

सीएम योगी ने कहा कि जिनको विकसित भारत की संकल्पना पचती नहीं हैं, कुछ लोग साजिश कर रहे हैं। यह देश कभी कमज़ोर नहीं था। 2017 के पहले भी उत्तर प्रदेश था। कोई पर्व त्योहार नहीं मना सकते थे। न बेटियां, मंदिर, विद्यालय कोई सुरक्षित नहीं थे। राह चलते लूट लिया जाता था। किसी भी गरीब की ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया जाता था। सुरक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है, जो कानून तोड़ेंगा उसको ऐसी सजा मिलेगी की सात पीढ़ी याद रखेगी।

सीएम योगी के बयान पर अखिलेश का पलटवार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण पर सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “उनसे कहिए कि वे ‘कयामत’ जैसे उर्दू शब्दों का इस्तेमाल न करें। जो मुख्यमंत्री उर्दू के खिलाफ थे, वे अब ‘कयामत’ जैसे शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं। कुछ और शब्दों का इस्तेमाल करें। जब मुख्यमंत्री घिर जाते हैं, भाजपा कमजोर पड़ जाती है, उन्हें सत्ता खोने का डर सताने लगता है, वे सांप्रदायिक हो जाते हैं। जितना ज्यादा डर होता है, उतना ही ज्यादा वे सांप्रदायिक हो जाते हैं।”

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