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जब संबित पात्रा ने यास्मीन फारूकी को कहा दादीजी, भड़की पैनलिस्ट ने कहा इन्हें तमीज नहीं

डिबेट के दौरान संबित पात्रा ने फारूकी को दादीजी कहकर संबोधित किया, जिससे वो काफी नाराज हो गईं और डिबेट छोड़ दी।

Babri masjidAIMPLB की यास्मिन फारूकी और भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा। (ट्विटर और फेसबुक)

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह समेत 32 अभियुक्तों को बड़ी राहत देते हुए सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। सभी अभियुक्तों के बरी होने और कोर्ट के फैसले पर टीवी चैनल न्यूज18 इंडिया के कार्यक्रम ‘आर पार’ में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की यास्मीन फारूकी के बीच तीखी कहासुनी हो गई है और वो बीच डिबेट छोड़कर चली गईं।

दरअसल डिबेट के दौरान संबित पात्रा ने फारूकी को दादीजी कहकर संबोधित किया, जिससे वो काफी नाराज हो गईं और डिबेट छोड़ दी। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘आपको किसी से नहीं मिला रहे हैं दादीजी। ये वहीं दादीजी हैं क्या, जिन्हें अवार्ड मिला है। मैं आपसे बात नहीं कर रहा हूं। जरा दादीजी को शांत करो। दादी को शांत करो। मैं इनसे बात ही नहीं कर रहा हूं। मैं आपसे बात ही नहीं कर रहा हूं दादी जी।’

भाजपा प्रवक्ता के खुद को दादीजी कहने पर बोर्ड यास्मिन फारूकी खासी नाराज हो गईं। उन्होंने कहा, ‘आप सिवाए बदतमीजी के कुछ नहीं कर सकते हैं। मैं डिबेट छोड़ रही हूं। आपकी वजह से हर आदमी ने इस चैनल पर आना छोड़ दिया। कोई भी तमीजदार आदमी आपकी वजह से चैनल पर आता नहीं है। आपकी वजह से किसी भी समझदार आदमी ने इस चैनल पर आना छोड़ दिया है, और मैं भी डिबेट छोड़कर जा रही हूं। इन्हें तमीज नहीं है।’

यहां देखें वीडियो-

उल्लेखनीय है कि बाबरी विध्वंस पर फैसले के बाद सीबीआई ने कहा कि कानूनी विभाग से विमर्श के बाद फैसले को चुनौती देने के बारे में कोई निर्णय किया जाएगा। इधर अपने फैसले में अदालत ने कहा कि सीबीआई इस मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने योग्य साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। जांच एजेंसी बाबरी मस्जिद ढहाने वाले कारसेवकों की ढांचा विध्वंस के इस मामले में अभियुक्त बनाए गए लोगों से कोई साठगांठ साबित नहीं कर सकी है।

सीबीआई ने इस मामले में 351 गवाह और करीब 600 दस्तावेजी सबूत अदालत में पेश किए थे। सभी अभियुक्तों ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताते हुए केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर दुर्भावना से मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाया था। बता दें कि बाबरी विध्वंस मामले में लालकुष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डा. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे। (एजेंसी इनपुट)

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