आजमगढ़ की स्थानीय एक अदालत ने मंगलवार को 27 साल पुराने हत्याकांड में 12 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। यह मामला शिया-सुन्नी हिंसा से जुड़ा हुआ था। ये आरोपी जमानत पर पहले बाहर आ गये थे। शुक्रवार को पुलिस ने इन्हें फिर से हिरासत में ले लिया। इन पर दंगे, हत्या और सबूत नष्ट करने जैसे गंभीर आरोप थे।

आजमगढ़ के अतिरिक्त जिला सरकारी वकील दीपक मिश्रा ने बताया, “अदालत ने मंगलवार को सभी 12 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी। सभी आरोपियों की उम्र 55 साल से ऊपर है और ये सुन्नी समुदाय के हैं। इसके साथ ही हर एक पर 66,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। उन्हें फिर जेल भेज दिया गया।”

मामला 28 अप्रैल 1999 का है

प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, यह मामला 28 अप्रैल 1999 का है। उस दिन मुभारकपुर पुलिस स्टेशन में शिया समुदाय के 57 वर्षीय अली अकबर के लापता होने की शिकायत दर्ज की गई थी। बताया गया कि वह जुलूस में भाग लेने गए थे और घर वापस नहीं लौटे। दो दिन बाद पुलिस ने उनका सिर काटा हुआ शव एक तालाब में पाया। शव की पहचान मृतक के परिवार ने की।

जांच में पता चला कि 27 अप्रैल को शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों के बीच झड़प हुई थी, और इसके बाद अली अकबर लापता हो गए। आरोप है कि आरोपी ने उन्हें जुलूस से लौटते समय पकड़कर हत्या कर दी और उनका सिर काटकर तालाब में फेंक दिया। इस हत्या के बाद इलाके में तनाव फैल गया और और हिंसा की घटनाएं हुईं। पुलिस ने हत्या के मामले में कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से चार की मुकदमे के दौरान मौत हो गई।

वहीं, बचाव पक्ष के वकील स्वामी नाथ यादव ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उन्होंने बताया कि तीन आरोपियों को छोड़कर बाकी सभी अलग-अलग परिवारों के हैं और लंबे समय से जमानत पर बाहर थे। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक मृतक का सिर नहीं मिला है।

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सुप्रीम कोर्ट ने शादी से पहले शारीरिक संबंधों को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि शादी से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए पूरी तरह से अजनबी होते हैं और उन्हें शारीरिक संबंध बनाने से पहले सावधान रहना चाहिए। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच शादी का झूठा वादा करके बलात्कार करने के आरोपी एक शख्स की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पूरी खबर के लिए यहां पर क्लिक करें।