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सबसे बड़े आवासीय सेक्टर में दर्जनों इमारतें जर्जर

असुरक्षित घोषित होने वाली ज्यादातर इमारतें उन इलाकों में हैं जहां पर पूरी तरह से अवैध निर्माण कर 30-40 लाख रुपए कीमत वाले फ्लैट बना दिए गए हैं। अब आनन-फानन में इमारतों को खाली कराने के दौरान वहां रहने वाले विरोध कर रहे हैं। निठारी गांव की ही 30 से ज्यादा इमारतों को जर्जर बताया गया है।

Author July 30, 2018 6:08 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

दो दिनों की बरसात ने शहर में अवैध और अनधिकृत निर्माण को आइना दिखा दिया है। शाहबेरी और गाजियाबाद में इमारत धंसने के हादसों के बाद प्राधिकरण जर्जर हो चुके मकानों और असुरक्षित भवनों की जांच कर नोटिस चस्पा कर रहा है। असुरक्षित घोषित होने वाली ज्यादातर इमारतें उन इलाकों में हैं जहां पर पूरी तरह से अवैध निर्माण कर 30-40 लाख रुपए कीमत वाले फ्लैट बना दिए गए हैं। अब आनन-फानन में इमारतों को खाली कराने के दौरान वहां रहने वाले विरोध कर रहे हैं। निठारी गांव की ही 30 से ज्यादा इमारतों को जर्जर बताया गया है। वहां पर जांच अभियान अभी भी जारी है। दशकों पहले सेक्टर- 12 के विभिन्न ब्लाक, छलेरा, बरौला, वाजिदपुर और नया बांस में भी इमारत जांच अभियान शुरू करने की तैयारी है। यहां भी काफी पहले बनी दर्जनों इमारतें जर्जर हालत में हैं। इन सभी पर नोटिस चस्पा किया जाएगा। ताकि इमारत गिरने से जान-माल का नुकसान ना हो।

उधर, शाहबेरी में रविवार को गिरने की आशंका को लेकर एक इमारत खाली कराई गई है। थाना बिसरख क्षेत्र में बनी इस इमारत में 7 परिवार रह रहे थे। सेक्टर- 58 के बी ब्लॉक की एक इमारत को खाली करा दिया गया है। शनिवार को प्राधिकरण ने इस इमारत को असुरक्षित करार करते हुए नोटिस चस्पा किया था। माना जा रहा है कि बारिश होने पर यह इमारत कभी भी गिर सकती है। इस वजह से रविवार को इसे खाली करा लिया गया है। बी-5 नंबर वाली इस इमारत के साथ वाली बी-4 और बी-6 को भी जल्द खाली करने को कहा गया है।
करीब 20 हजार हेक्टेयर में बसे नोएडा शहर की इमारतों को जांच के दायरे में रखा गया है। जिनमें भूमिगत तल बने हुए हैं। जांच के लिए शहर को दो भागों में बांटा गया है। पहला गांव की आबादी या लाल डोरा क्षेत्र और दूसरा प्राधिकरण का अधिसूचित इलाका है।

प्राधिकरण अधिसूचित इलाके में सेक्टर, सोसायटी और बहुमंजिला रिहायशी अपार्टमेंट बने हैं। इसी श्रेणी में शहर के सबसे सेक्टर- 12 से ए से जेड ब्लॉक तक हैं। करीब दो लाख आबादी वाले इस सेक्टर में ढाई मंजिल तक बनाने की अनुमति है लेकिन लोगों ने यहां 4-5 मंजिला इमारत तान रखी है। मानकों के अनुसार यह खतरे की घंटी का संकेत है। इन इमारतों की नींव इतनी मजबूत नहीं है कि 4-5 मंजिल तक के भार के बाद भी मजबूत बनी रहे लेकिन रुपए के लालच में लोगों की जिंदगी खतरे में डाल दिया है। हालांकि प्राधिकरण दस्ते ने पहले भी यहां अभियान चलाकर इमारतों को चिह्नित किया था। नोटिस भी जारी किए गए थे लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस मर्तबा कार्रवाई तय मानी जा रही है। दो दिनों की बारिश के दौरान इसी सेक्टर में सबसे ज्यादा जल भराव की शिकायतें मिली थीं। घरों में एक से डेढ़ फीट तक पानी भर गया था। सेक्टर- 15 स्थित नया बांस गांव में भी दर्जनों ऐसी इमारतें हैं, जिनको बने 30 साल हो चुके हैं। हरौला, बरौला, बाजिदपुर आदि गांवों में भी अवैध रूप से बहुमंजिला फ्लैट बना दिए गए हैं।

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