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औरंगजेब ने मंदिर तोड़ा…इतिहास सही है या इस्लाम? जब मौलाना से लड़के ने पूछा सवाल, जानें- क्या आया जवाब

कार्यक्रम में युवक ने कहा, “ऐ काश! इस मुल्क में ऐसी फिजा बनें कि मंदिर गिरे तो दर्द मुसलमान को भी हो और पामाल होने पाए न मस्जिद की आबरू फिक्र मंदिरों के निगहबान की भी हो।”

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ज्ञानवापी मस्जिद (Photo Credit- ANI)

वाराणसी के काशी विश्वनाथ परिसर स्थित ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे को लेकर विवाद फिलहाल कोर्ट में है, लेकिन इस पर आम जनता दोनों पक्षों के लोगों से तमाम तरह के सवाल जवाब लगातार पूछ रही है। आजतक न्यूज चैनल पर वाराणसी से शंखनाद स्पेशल कार्यक्रम में जनता और दोनों पक्षों के बीच बातचीत के दौरान एक युवक ने मौलाना साहब से सवाल पूछा कि “औरंगजेब ने मंदिर तोड़ा…इतिहास सही है या इस्लाम?

इस पर मौलाना साहब ने अपने जवाब में कहा, “इसमें 16 आने खरी इस्लाम सही है तभी तो मैं खड़ा हूं। देखिए ताकतवर लोग चले गए, आटोमन इंपायर छह सौ साल तक हुकूमत करके चला गया, मुगल शासक चार सौ साल तक हुकूमत करके चला गया, इस्लाम अपने आयडियोलॉजी पर टिका हुआ है। हम लोग फॉलोवर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम के हैं न की औरंगजेब के हैं।”

उनके इस जवाब के बाद एक अन्य युवक ने कहा, “ऐ काश! इस मुल्क में ऐसी फिजा बनें कि मंदिर गिरे तो दर्द मुसलमान को भी हो और पामाल होने पाए न मस्जिद की आबरू फिक्र मंदिरों के निगहबान की भी हो।” सवाल-जवाब के दौर में और भी कई सवाल दोनों पक्षों के पैनल के मेहमानों से पूछे गए।

इस बीच ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वाराणसी जिला अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अगली तारीख दे दी है। अब इस मामले पर 26 मई को सुनवाई होगी। कोर्ट मुस्लिम पक्ष की मांग ऑर्डर 7 रूल 11 के आवेदन पर इस दिन सुनवाई करेगी।

इसके अलावा कोर्ट ने दोनों पक्षों से सर्वे आयोग की रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए भी कहा है। इसके लिए दोनों पक्षों को सात दिनों का समय दिया गया है। वहीं मंगलवार को सुनवाई के दौरान हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने वाराणसी जिला न्यायालय में एक अभियोग आवेदन दिया। इसमें मांग की गई कि ज्ञानवापी मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए और भगवान शिव के भक्तों को पूजा के लिए मस्जिद परिसर दे दिया जाए।

क्या है ऑर्डर 7 रूल 11- इसका मतलब होता है कोर्ट किसी मामले को तथ्यों की मेरिट पर सुनवाई करने की जगह उस याचिका के बारे यह फैसला लेता है कि वह सुनने लायक है या नहीं? साथ ही याचिकाकर्ता जो मांग कर रहा है, वो दी जा सकती है या नहीं? अगर कोर्ट को लगता है कि राहत नहीं दी जा सकती है तो बिना ट्रायल के ही मांग खारिज कर दी जाती है। इसके अलावा रूल सात के तहत कई वजहें हैं जिसके आधार पर मुकदमा खारिज किया जा सकता है।

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