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औरेया हादसाः ‘बेटा बोला था कल आ रहा हूं, पर अगले दिन आई मौत की खबर’, झारखंड के मजदूर पिता का दर्द, 19 हजार रुपए खर्च कर मिली लाश

Auraiya accident: पिता सुदाम कहते हैं, 'शनिवार सुबह, मैंने टीवी पर देखा कि एक सड़क दुर्घटना हुई थी और उसमें शामिल एक ट्रक राजस्थान से आ रहा था। मैंने अपने बेटे को फोन करने की कोशिश की, मगर उसका फोन बंद था। मैंने दूसरे शख्स को फोन किया जो उसी के साथ काम करता था। उसने मुझे बताया कि मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं रहा।'

Author , Translated By Ikram औरेया, रांची | Updated: May 18, 2020 8:17 AM
Auraiya victimऔरैया में मृतक के शव को ले जाते हुए परिजन हुए। (Vishal Srivastav)

Auraiya accident: उत्तर प्रदेश के औरेया में शवगृह के बाहर रविवार दोपहर के समय 43 वर्षीय सुदामा यादव बर्फ के ब्लॉक को घूरते रहे, जहां फर्श पर चारों तरफ पिघला हुआ पानी पड़ा है। अंदर पोस्टमार्टम परीक्षक अभी काम कर रहे थे। झारखंड के पलामू में एक खेत मालिक सुदामा ने यहां तक आने के लिए कार चालक को 19000 रुपए का भुगतान किया है, जो उन्हें और उनके जीजा गुड्डू यादव को औरेया लेकर आया।

दोनों यहां सुदामा के सबसे बड़े बेटे नीतीश (21) का शव के लेने के लिए आए थे। नीतीश उन 26 प्रवासी मृतकों में से एक हैं जिनकी ट्रक और डीसीएम वाहन के बीच हुई टक्कर के बाद मौत हो गई थी। नीतीश जयपुर में एक मार्बल फैक्ट्री में काम करते थे। सुदाम कहते हैं, ‘मैंने शुक्रवार शाम 8 बजे के आसपास अपने बेटे से आखिरी बार बात की। उसने कहा कि वह गया (बिहार) के लिए एक ट्रक में सवार हुआ था और अगले दिन पहुंचेगा।’

सुदाम कहते हैं, ‘शनिवार सुबह, मैंने टीवी पर देखा कि एक सड़क दुर्घटना हुई थी और उसमें शामिल एक ट्रक राजस्थान से आ रहा था। मैंने अपने बेटे को फोन करने की कोशिश की, मगर उसका फोन बंद था। मैंने दूसरे शख्स को फोन किया जो उसी के साथ काम करता था। उसने मुझे बताया कि मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं रहा।’

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सुदामा और गुड्डू को औरेया छोड़ने के बाद झारखंड लौटे ड्राइवर ने सुदामा के हवाले से बताया कि जिला प्रशासन उनके बेटे के शव के लिए परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। शव को बाद में वातानुकूलिन एंबुलेंस में रखा गया। सुदामा की एक बेटी भी है जिसने हाल में स्कूली पढ़ाई पूरी की है और एक छोटा बेटा भी है जो कक्षा आठ में पढ़ रहा है। सुदामा ने कहा, ‘नीतीश घर में सबसे बड़ा था और उसने कक्षा सात के बाद पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि वो पैसे कमाकर घर की आर्थिक मदद करना चाहता था। लॉकडाउन के दो महीने बाद तक उसे वेतन तक नहीं मिला। 13 मई को मैंने उसे तीन हजार रुपए भेजे थे ताकि वो घर लौट सके।’

वहीं शवगृह के अधिकारियों ने कहा कि बर्फ के ब्लॉक पर रखे जाने के बाद कुछ शव ट्रकों में भेज दिए गए थे। औरैया के अतिरिक्त एसपी कमलेश कुमार दीक्षित ने कहा कि खुले ट्रक में कोई शव नहीं भेजा गया था। उन्होंने कहा कि कुछ को कवर डीसीएम ट्रकों में भेजा गया, कुछ को एसयूवी में भेजा गया, मगर किसी को खुले में ट्रक में नहीं भेजा गया।

स्टेशन हाउस ऑफिसर दिनेश कुमार ने कहा कि शवों की पहचान के लिए हमने घायलों की मदद ली। कुछ की पहचान उनकी जेबों में पेपर चिट्स की मदद से की गई, जिनमें फोन नंबर थे। पूरी प्रक्रिया खत्म हो गई है। दो शवों को छोड़कर सभी शवों को कांस्टेबल के साथ भेज दिया गया है।

बता दें कि दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को पचास-पचास हजार रुपए की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री ने फिर से कहा है कि सभी सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी ट्रक जैसे असुरक्षित साधन से यात्रा ना करे।

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