बिहार के श्रम मंत्री अरुण शंकर के काफिले पर हमला हुआ है। मंत्री का आरोप है कि यह हमला शराब माफिया ने कराया है। रविवार को मधुबनी जिले के खजौली प्रखंड के ठाहर गांव में अरुण शंकर पहुंचे थे। उनका आरोप है कि काफिले पर ग्रामीण महिलाओं ने अचानक हमला कर दिया। बांस-पल्ली और पत्थरों से वार किया गया। हमले में मंत्री की गाड़ी का शीशा पूरी तरह टूट गया। मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने मंत्री की जान बचाई।
घटना के तुरंत बाद डीआईजी मनोज कुमार तिवारी और एसपी योगेंद्र कुमार मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मामले की सख्त जांच कराने की बात कही है। हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक भोला राय के पिता के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिवार से मिलने गए थे। इसी दौरान उन पर हमला किया गया। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हमला वास्तव में शराब माफिया ने कराया था या इसके पीछे कोई और वजह और लोग शामिल थे।
अरुण शंकर ने क्या बताया?
मीडिया से बात करते हुए अरुण शंकर ने कहा कि वे इस हमले में एक गहरी साजिश देखते हैं। उन्होंने सीधे-सीधे इस हमले के लिए शराब माफियाओं को जिम्मेदार बता दिया। यह कोई पहली बार नहीं है जब बिहार में शराब माफियाओं पर इस तरह के हमले के आरोप लगे हों। इससे पहले भी ऐसे हमले हो चुके हैं, सिर्फ जिले बदल जाते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति प्रशासन को चुनौती देने का काम करती है।
वैसे बिहार की राजनीति में इस समय शराब माफियाओं के अलावा सुरक्षा का मुद्दा भी विवादों में हैं। असल में बिहार सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती किए जाने के फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता रोहिणी आचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला लालू परिवार को नुकसान पहुंचाने की मंशा से लिया गया है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
रोहिणी आचार्य ने शनिवार को माइक्रो ब्लॉगिंग साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सुरक्षा कवर में कटौती के बाद केवल दिखावे के लिए सुरक्षा कर्मियों को तैनात रखने का कोई औचित्य नहीं था। इसी वजह से राबड़ी देवी ने अपने आधिकारिक आवास से शेष सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का फैसला लिया।
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