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VC के लिए हड़ताल पर बैठे बेंगलुरु के नामी लॉ कॉलेज के 400 छात्र, 31 साल में ऐसा पहली बार हुआ

सोमवार से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं को 400 से अधिक स्नातक छात्रों ने बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। एनएलएसआईयू के 31 साल के इतिहास में यह पहली बार होगा। जब छात्रों परीक्षाओं का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।

photo source- indian express

देश के प्रमुख लॉ स्कूलों में से एक नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) की दीवार पर लगा एक पोस्टर तत्काल कुलपति नियुक्ति की मांग कर रहा है। यह पोस्टर लैटिन समेत कई अन्य भाषाओं में है। नए वीसी प्रो सुधीर कृष्णास्वामी के नियुक्ति में हो रही देरी के विरोध में सोमवार से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं को 400 से अधिक स्नातक छात्रों ने बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। NLSIU  के 31 साल के इतिहास में यह पहली बार है, जब छात्र कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली समिति ने कृष्णास्वामी  के नाम की सिफारिश की:  1998 में NLSIU  से स्नातक कृष्णास्वामी को 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली समिति ने वीसी के लिए सिफारिश की थी, लेकिन विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद को औपचारिक आदेश जारी करना अभी बाकी है। 27 साल से अधिक समय से NLSIU संकाय के सदस्य प्रो एम के रमेश को पिछले महीने कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया था।

छात्रों को नए वीसी के चयन प्रक्रिया शुरू होने की आशंका : छात्रों को लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नही मानने में कार्यकारी परिषद द्वारा देरी करना एक तरह से सिफारिश को नकारने का प्रयास है, और नए वीसी को खोजने की प्रक्रिया को दोहराता हैं। परीक्षा समाप्त होने के एक दिन बाद 28 सितंबर को कार्यकारी परिषद की बैठक निर्धारित है, लेकिन छात्र परिसर से बाहर चले गए। एक छात्र ने कहा कि प्रशासन सिफारिश के खिलाफ असंतोषजनक नोट लाने और वीसी चयन प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के लिए जमीन तैयार कर रहा है।रविवार को एक बयान जारी कर NLSIU  छात्र बार एसोसिएशन ने आशंका व्यक्त की है कि कार्यकारी परिषद की संरचना को अंतरिम प्रशासन द्वारा अवैध रूप से संशोधित किया जा रहा है।

National Hindi News, 23 September 2019 LIVE Updates: देश-दुनिया की हर खबर पढ़ने के लिए यहां करें क्लिक

हितों का टकराव: NLSIU  के छात्र नेता हमजा तारिक और दिव्यांशु बोबडे ने कहा कि कार्यकारी परिषद की संरचना को इसकी 89 वीं बैठक से एक सप्ताह पहले बदल दिया गया है। रजिस्ट्रार और NLSIU  के बीच में स्पष्ट रूप से हितों का टकराव दिख रहा है। कृष्णस्वामी की नियुक्ति को जानबूझकर रोकने के लिए छात्रों ने रजिस्ट्रार ओमप्रकाश वी. नंदीमठ की आलोचना की है। हालाकि नंदीमठ सर्च कमेटी द्वारा विचार किए गए 16 आवेदकों में से एक था, लेकिन उसका नाम शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया था।

कृष्णास्वामी को 12 सदस्यों ने दिया समर्थन: कार्यकारी परिषद के कम से कम 12 सदस्यों ने बहुमत की राय के आधार पर कृष्णास्वामी की नियुक्ति को मंजूरी दी है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कृष्णास्वामी के प्रशासनिक अनुभव में कमी का हवाला देते हुए, उनको वीसी बनाए जाने के प्रति असहमतिपूर्ण टिप्पणी की है।

वीसी ने रिपोर्ट को अस्वीकार किया: कार्यवाहक कुलपति ने 20 सितंबर को चार सदस्यीय एक समिति का गठन किया, जिसमें दो संकाय सदस्य और छात्र निकाय के दो सदस्य शामिल थे, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित फाइलों को देखा जा सके। हालांकि, समिति ने प्रक्रिया में खामियों और नंदीमठ के कथित हितों के टकराव की रिपोर्ट के बाद, वीसी ने रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया, और बैठक से बाहर चले गए। इस घटना के बाद स्टूडेंट बॉडी एसोसिएशन ने तत्काल बहिष्कार करने के लिए एक सामान्य सभा की बैठक बुलाई।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से हस्तक्षेप की मांग: इस सिफारिश को औपचारिक रूप से कार्यकारी परिषद द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, (जो NLSIU  के कुलाधिपति हैं), और जनरल काउंसिल के एक सदस्य से अनापत्ति के बाद समर्थन करना है। संकाय के कुछ वरिष्ठ सदस्यों द्वारा समर्थित, प्रशासन ने नियुक्ति में देरी के लिए CJI के कार्यालय को दोषी ठहराया है। रजिस्ट्रार ने एक बैठक में दावा है कि CJI के कार्यालय को एक औपचारिक अधिसूचना जारी करने के लिए हस्ताक्षर करना है, और हमें वह प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि 13 सितंबर को NLSIU के पूर्व छात्र संघ ने CJI के नए चुने गए कुलपति को नियुक्त करने की प्रक्रिया के तार्किक समापन को सुनिश्चित करने में हस्तक्षेप की मांग की थी।

31 जुलाई को रिटायर्ड हुए थे पूर्व वीसी: नए वीसी के नियुक्ति पूर्व वीसी प्रो आर वेंकट राव के 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने और सीजेआई द्वारा नियुक्त किए गए विशेषज्ञों के पैनल और कार्यकारी परिषद की एक उप-समिति द्वारा अपने उत्तराधिकारी को चुने जाने के बावजूद अधर में लटकी हुई है। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण अनुभव के साथ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रोड्स विद्वान कृष्णस्वामी, वर्तमान में अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।

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