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असम: मां की नागरिकता का केस लड़ने के नहीं थे पैसे, बेटे ने की खुदकुशी, 20 दिन पहले ही बना था पिता

मां शांति चंद ने पत्रकारों से कहा, "वह तनाव में था, क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं थे। हम दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग हैं। यहां तक कि परेशान होकर वह मुझे भी कई बार डांट देता था। कहता था कि बगैर पैसों के कोर्ट में मैं कैसे तुम्हारे लिए कानूनी लड़ाई लड़ूं।"

तस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है। (फोटो सोर्स- एक्सप्रेस फाइल फोटो)

असम में एक शख्स के पास मां की नागरिकता का केस लड़ने के लिए पैसे नहीं थे। मजबूरी से तंग आकर उसने खुदकुशी कर ली। रविवार (10 सितंबर) को उसकी लाश पुलिस को पेड़ पर बंधे फंदे से लटकी मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान 37 वर्षीय बिनय चंद के रूप में हुई है। वह दिहाड़ी मजदूरी करता था। 20 दिन पहले ही वह पिता बना था। लेकिन कई दिनों से वह परेशान चल रहा था। कारण- एनआरसी में उसकी मां का नाम नहीं था।

असम की मतदाता सूची में उसकी मां को संगिद्ध नागरिक या ‘डी वोटर’ के तौर पर शामिल किया गया था। बिनय ने उसके बाद फॉरेनर्स ट्रिबूयनल में न्याय के लिए दरवाजा खटखटाया। दिहाड़ी मजदूरी के जरिए जो कुछ रकम उसने जुटाई थी, वह इस कानूनी लड़ाई लड़ने पर खर्च कर दी थी।

परिजन और पड़ोसियों के हवाले से पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि बिनय की मां फॉरेनर्स ट्रिबूयनल में केस हार गई थीं। वह इसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहता था। पर उसके पास आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पैसे ही नहीं थे। इसी बात ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 दिनों पहले बिनय का बेटा पैदा हुआ है। मां शांति चंद ने पत्रकारों से कहा, “वह तनाव में था, क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं थे। हम दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग हैं। यहां तक कि परेशान होकर वह मुझे भी कई बार डांट देता था। कहता था- बगैर पैसों के कोर्ट में मैं कैसे तुम्हारे लिए कानूनी लड़ाई लड़ूं?”

वहीं, पड़ोस में रहने वाले बाबुल डे का कहना है, “इनके (चंद के परिवार) पास 1960 के दौरान के जमीन के कागजात हैं। अभी तक ये लोग तब से हर चुनाव में वोट डाल रहे थे। पर फॉरनर ट्रिब्यूनल ने उनकी मां को संदिग्ध नागरिक की श्रेणी में रखा, लिहाजा उनके पास हाईकोर्ट जाने के अलावा और कोई चारा नहीं है। गरीब लोगों के लिए इस तरह की लड़ाई बहुत कठिन हो जाती है। वे उस दौरान काफी तनाव में आ जाते हैं।”

आपको बता दें कि एनआरसी में असम के तकरीबन 1.25 लाख लोगों को बाहर रखा गया है। इन लोगों को संदिग्ध नागरिक या डी वोर्टस बताया गया है। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया गया था। बिनय का परिवार भी इन्हीं लोगों में शामिल है।

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