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सिटिजनशिप बिल का विरोध: साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार विजेता और पत्रकार पर राजद्रोह का मुकदमा

असम में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच गुरुवार को पुलिस ने असमी साहित्यकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता डॉक्टर हिरेन गोहेन, वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंत और केएमएसएस नेता अखिल गोगोई के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है।

Author गुहावटी | Updated: January 10, 2019 5:49 PM
पुलिस ने असमी साहित्यकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता डॉक्टर हिरेन गोहेन, वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंत और केएमएसएस नेता अखिल गोगोई के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। (photo-PTI)

असम में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच गुरुवार को पुलिस ने असमी साहित्यकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता डॉक्टर हिरेन गोहेन, वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंत और केएमएसएस नेता अखिल गोगोई के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने यहां पत्रकारों को बताया कि पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए लातासिल पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (ए), 120 (बी) समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
कुमार ने कहा, “इन सभी के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज किया गया है। मैं इसकी जांच कर रहा हूं कि यहां सात जनवरी को हुई नागरिक समाज की बैठक के दौरान उन्होंने क्या कहा था।” तीनों एक नागरिक संगठन, नागरिक समाज के सदस्य हैं जो नागरिकता (संशोधन) विधेयक का विरोध कर रहा है।

बता दें कि असम में विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर हो रहा विरोध बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। छात्रों, वकीलों एवं डॉक्टरों ने समूचे राज्य में विधेयक के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।नागरिकता (संशोधन) विधेयक को दो दिन पहले लोकसभा ने पारित कर दिया था। इस विधेयक के कानून बनने के बाद, धार्मिक अत्याचार के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भागकर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। असम में एक तरह का विशेष स्कार्फ हाथ में पकड़े लोगों ने यहां सचिवालय के सामने संकल्प दिवस मनाया और कहा कि यह विधेयक असमी लोगों के अस्तित्व के लिए खतरा है।

उन्होंने चेताया कि अगर उनके हितों को नुकसान पहुंचाया गया तो ‘प्रधानमंत्री तथा उनके कैबिनेट सहयोगियों को’ राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
अपने 70 साझेदार संगठनों के साथ आंदोलन की अगुवाई कर रहे कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) ने बुधवार को संकल्प लिया था कि जब तक नागरिकता (संशोधन) विधेयक को वापस नहीं लिया जाता है तब तक प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को पूर्वोत्तर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
गौहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कनिष्ठ डॉक्टरों ने काम करने के दौरान काली पट्टी बांधी जबकि असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विधि विभाग ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आंदोलनकारियों ने ‘जय आई असम’ (असम माता की जय) के नारे लगाते हुए शपथ ली कि वे ‘‘मूल निवासियों के हितों की रक्षा करेंगे’’ गुवाहाटी में, शिक्षण संस्थानों में छात्रों ने अपनी कक्षाओं का बहिष्कार किया और राज्य की राजधानी दिसपुर तक विरोध मार्च निकालने कोशिश की लेकिन सुरक्षा बलों ने उनके प्रयास को नाकाम कर दिया।

केएमएसएस प्रमुख अखिल गोगोई ने सचिवालय के बाहर पत्रकारों से कहा कि विधेयक दमनकारी और सांप्रदायिक है। गोगोई ने कहा, ‘‘ अगर इस विधेयक को स्वीकार किया जाता है तो भारत का धर्मनिरपेक्ष ताना बाना तबाह हो जाएगा। असमी लोगों ने हमेशा अवैध प्रवासियों का विरोध किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ अगर नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित होता है तो कम से कम 19 करोड़ बांग्लादेशी लोग असम की तरफ आ जाएंगे। इससे असम के वास्तविक लोगों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।’’ नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर विवाद के बीच राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की वैधता पर गोगोई ने कहा, ‘‘ अगर विधेयक कानून बनता है तो एनआरसी बेकार हो जाएगी। एनआरसी अपडेट हो गई है और विदेशियों को राज्य से बाहर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।’’

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