असम में 2019 में जारी की गई NRC लिस्ट फाइनल नहीं, हाई कोर्ट को बताया 4,700 नामों में है गड़बड़ी

अदालत को बताया कि अगस्त 2019 में जारी की गई एनआरसी सूची सपलीमेंट्री थी जिसमें 4,700 लोगों के नाम ऐसे थे जो नहीं होने चाहिए थे।

NRC,CAAअसम में अंतिम एनआरसी सूची अभी जारी नहीं की गई है।

असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन के संयोजक हितेश शर्मा ने गुवाहाटी हाइकोर्ट को बताया कि रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा अंतिम एनआरसी जारी किए जाना अभी बाकी है। अदालत में दायर किए गए एक हलफनामें में हितेश शर्मा ने कहा कि एनआरसी की अंतिम सूची पर रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया ने फिलहाल कुछ नहीं कहा है। बता दें कि दिसंबर महीने में ही शर्मा ने ये हलफनामा अदालत में दायर किया था। उन्होंने अदालत को बताया कि अगस्त 2019 में जारी की गई एनआरसी सूची सपलीमेंट्री थी जिसमें 4,700 लोगों के नाम ऐसे थे जो नहीं होने चाहिए थे।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में 2019 में छपी एनआरसी सूची में 19 लाख लोगों के नाम नहीं थे। जिसमें साढ़े 5 लाख हिंदू तो वहीं 11 लाख लोग मुस्लिम समुदाय के थे। तकरीबन 3 करोड़ से ऊपर लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था। तत्कालीन असम के एनआरसी संयोजक ने उस समय इस सूची को अंतिम एनआरसी सूची करार दिया था।

हालांकि असम सरकार ने तत्कालीन एनआरसी संयोजक पर ही आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने सूची में गड़बड़ की है। राज्य सरकार के साथ आई रिश्तों में तल्खी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने उनका तबादला राज्य से बाहर कर दिया था। गौरतलब है कि एनआरसी सूची से बाहर किए गए 19 लाख लोगों को सूची से बाहर किए जाने का आदेश नहीं मिला है जिससे वह ट्रिब्यूनल में इसके खिलाफ शिकायत नहीं कर सके हैं।

मौजूदा एनआरसी संयोजक ने कहा कि उन्होंने एनआरसी सूची में हुई गड़बड़ की जानकारी रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया को दे दी है। फिलहाल आरजीआई की ओर से उन्हें कोई भी निर्देश नहीं मिले हैं। फिलहाल एनआरसी की अंतिम सूची कब तक जारी की जाएगी इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि कहा गया है कि रिजेक्शन स्लिप जारी की जाए और एनआरसी अपडेट किए जाने का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

गौरतलब है कि असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि एनआरसी सूची की फिर से जांच की जाए क्योंकि उसमें कई लोगों के नाम शामिल हो गए थे और कई के बाहर हो गए थे। 2019 की सूची को देखते हुए कई जिलों से नए लोगों को शामिल करने और कई लोगों को सूची से हटाने की मांग आई थी। मामले में जिलों को नाम शामिल करने और हटाने के आदेश एनआरसी कार्यालय द्वारा दिए गए हैं।

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