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NRC का साइड इफेक्ट! 88 वर्षीय बुजुर्ग ने की खुदकुशी, परिवार का दावा- नागरिकता खोने का था डर

एनआरसी से नाम हटने पर अशरब अली परेशान थे। बता दें कि डॉक्युमेंट में अली की उम्र 88 साल बताई जा रही है और उनका नाम 1971 के वोटर लिस्ट में भी शामिल है।

Author कामरूप | May 27, 2019 4:59 PM
अशरब अली (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

एनआरसी में नाम नहीं होने पर पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के डर से 90 साल के एक बुजुर्ग ने आत्महत्या कर ली। मामला असम के कामरूप जिले का है। बताया जा रहा है कि मृतक अशरब अली का नाम एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में शामिल था, लेकिन किसी के आपत्ति जताने के कारण उनका नाम लिस्ट से निकाल दिया गया। एनआरसी से नाम हटने पर अशरब अली परेशान थे। पड़ोसियों का कहना है कि इसी चिंता के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। बता दें कि डॉक्युमेंट में अली की उम्र 88 साल बताई जा रही है और उनका नाम 1971 के वोटर लिस्ट में भी शामिल है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने आत्महत्या की बात से इनकार किया है।

अफवाह ने ली बुजुर्ग की जानः अली के रिश्तेदार फजलुर रहमान के अनुसार, एनआरसी से नाम हट जाने पर अशरब को 23 मई को सुनवाई के लिए रंगिया जाना पड़ा। वहां सुनवाई के बाद उनका बॉयोमीट्रिक्स स्कैन भी हुआ था। इस बीच गांव में अफवाह उड़ी कि बॉयोमीट्रिक्स स्कैन उन लोगों का होता है, जो बाहर से इस देश में आते हैं, ताकि बाद में पुलिस उनको आसानी से पकड़ सके। गांव वालों की बातें सुनकर अशरब चिंतित हो गए थे। बताया जा रहा है कि इसी चिंता और डर के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।

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रिश्तेदार से पैसे मांगकर खरीदा जहर: अली के रिश्तेदार रहमान के अनुसार, अशरब ने किसी जानकार के पास जाने के लिए पैसे मांगे। उसने कहा था कि जानकार के बच्चों के लिए इफ्तार पर कुछ खाने के लिए ले जाएगा, लेकिन वह वहां नहीं गया। उन पैसों से उसने जहर खरीदा और उसे खा लिया। बता दें कि अशरब अली शनिवार (25 मई) की शाम लापता हो गए थे। उनकी डेडबॉडी रविवार (26 मई) को सोंटोली में एक स्कूल के पास से मिली।

पुलिस ने जहर खाने की बात से किया इनकारः कामरूप के अडिशनल एसपी संजीब सैकिया ने बताया कि घटनास्थल के पास से किसी प्रकार के जहर का निशान नहीं मिला है। ऐसे में पुलिस अभी जहर खाने की बात की पुष्टि नहीं कर रही। पुलिस को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। बता दें कि पिछले साल जुलाई में 40 लाख लोगों के नाम एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट से हटा दिए गए थे, जिसमें 36 लाख लोगों ने अपना दावा पेश किया था।

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