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इंडियन आर्मी में 30 साल रहे सनाउल्लाह को बता दिया विदेशी, जेल जाते वक्त फूट-फूट कर रोया था यह पूर्व सैनिक

भारतीय सेना में कई सालों तक अपनी सेवाएं देने वाले मोहम्मद सनाउल्लाह अपनी भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज दिखाने में नाकामयाब रहे हैं, जिसके चलते मोहम्मद सनाउल्लाह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

Author दिल्ली | Updated: June 12, 2019 9:11 AM
रिटायर्ड आर्मी अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह

भारतीय सेना में सूबेदार रहे मोहम्मद सनाउल्लाह जब डिटेंशन सेंटर से बाहर आए तो उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े। उन्हें हाल ही में गुवाहाटी हाई कोर्ट से शर्तों के साथ जमानत मिली है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि जेल के अंदर प्रवेश करते हुए मैं यह सोचकर बहुत रोया था कि तीन दशकों तक अपनी मातृभूमि की सेवा करने के बाद मुझे एक विदेशी का तमगा देकर बंदी बनाया जा रहा है। बता दें कि सनाउल्लाह को असम ट्राइब्यूनल के द्वारा विदेशी घोषित किया गया था।

क्या बोले पूर्व भारतीय सैनिक: सेना में सूबेदार रहे मोहम्मद सनाउल्लाह ने गुवाहाटी स्थित अपने घर में कहा, “मैंने सेना में 30 वर्षों तक सेवा की है। मुझे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, असम और मणिपुर में पोस्ट किया गया था। मैंने सीमा पर बहादुरी से खड़े होकर अपने देश की रक्षा की है। मुझे अपने देश से लगाव है। मैं एक भारतीय हूं और मुझे यकीन है कि मेरे मामले में न्याय होगा। बता दें कि सनाउल्ला (52), अगस्त 2017 में कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) के साथ एक सूबेदार के रूप में रिटायर हुए। वह 21 मई, 1987 को सेना में शामिल हुए थे और 2014 राष्ट्रपति के प्रमाण पत्र से सम्मानित थे।

असम पुलिस में किया काम: सनाउल्लाह ने सेना से रिटायर होने के बाद बाद क्लीयरेंस टेस्ट पास करने के बाद कामरूप (ग्रामीण) जिले में सब-इंस्पेक्टर के रूप में असम पुलिस की बॉर्डर विंग को ज्वाइन किया। लेकिन 2008-09 में एक संदिग्ध अवैध विदेशी के रूप में उनकी जांच करने के बाद, बॉर्डर विंग ने विदेशियों के ट्रिब्यूनल (एफटी) में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया और 23 मई को सनाउल्ला वह केस हार गए। जिसके छह दिन बाद उन्हें गोलपारा जिले के हिरासत केंद्र में भेज दिया गया।

हिरासत में लिए जाने वाले दिन पर बोले सनाउल्लाह: सनाउल्लाह ने उस दिन को याद करते हुए कहते हैं कि 28 मई की शाम को मुझे उत्तरी गुवाहाटी पुलिस स्टेशन के डीएसपी ने बुलाया तो मुझे लग गया कि ये मेरी हिरासत से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद, पूरी रात बैठे रहने के बाद पड़ा, अगले दिन शाम 7 बजे, मुझे गोलपारा के हिरासत शिविर में पहुंचा दिया गया। सनाउल्लाह ने कहा कि जिस जेल में मुझे रखा गया वहां करीब 40 लोग थे, जहां मुझे दो कंबल, एक मच्छरदानी और एक प्लेट और ग्लास दिए गए।

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