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टूटी सड़क के कारण 10Km तक हाथ से बने स्ट्रेचर पर प्रेग्नेंट महिला को अस्पताल ले गए लोग

रात के अंधेरे में उस टूटी हुई सड़क पर से गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना परिजनों के लिए काफी मुश्किल था।
यह सड़क इतनी खराब है कि यहां से कोई गाड़ी भी नहीं गुजरती है।

असम के मजुली में एक बहुत ही हैरान कर देना वाला वाकया सामने आया है जहां पर कोई साधन न मिलने के कारण एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के बाद हाथ से बने एक स्ट्रेचर पर 10 किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाना पड़ा। महिला को देर रात प्रसव पीड़ा शुरु हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने खुद ही अपने हाथों से एक स्ट्रेचर तैयार किया। महिला को उसमें बैठाकर परिजनों ने करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय की। यह दूरी तय करना इतना आसान नहीं था क्योंकि जिस सड़क से वे गुजर रहे थे उसकी हालत एकदम खस्ता थी। रात के अंधेरे में उस टूटी हुई सड़क पर से गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना परिजनों के लिए काफी मुश्किल था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस टूटी हुई सड़क से गुजना काफी मुश्किल होता है। कोई बीमार होता है तो उसे इसी तरह अस्पताल पहुंचाया जाता है। यह सड़क इतनी खराब है कि यहां से कोई गाड़ी भी नहीं गुजरती है।

देश में विकास की बात होती है लेकिन चुनावों के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं किया जाता। अगर समय पर महिला को ले जाने के लिए साधन मिल जाता और सड़क टूटी-फूटी न होती तो महिला और उसके परिजनों को इतनी परेशानी न उठानी पड़ती। यह पहला मामला नहीं है जहां पर किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान पैदल लेकर जाया गया हो। ऐसा ही एक मामला ओडिशा के रायगढ़ जिले में देखने को मिला था, जहां पर गर्भवती महिला को हॉस्पिटल ले जाने के लिए एम्‍बुलेंस तक की व्यवस्था नहीं हो सकी थी। इसकी वजह से महिला का स्ट्रेचर उसके रिश्तेदारों ने कंधे पर रखकर नदी पार कराई। महिला को रायगढ़ जिले के एक अस्पताल में डिलिवरी के लिए ले जाया जा रहा था।

रायगढ़ जिले के कल्याणसिंह पुर ब्लॉक की अंकू मीनायका (30) को लेबर पेन हो रहा था। महिला के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने एम्बुलेंस के लिए फोन किया था लेकिन एम्‍बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं कल्यानसिंहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने एम्‍बुलेंस नहीं देने के मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। गर्भवती महिला के अपने रिश्तेदारों के कंधों पर नदी पार करने के मामले में ओडिशा सरकार ने जांच के आदेश दिए थे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री पी के जेना ने पत्रकारों से कहा था कि, हमने जिला स्वास्थ्य अधिकारियों एवं जिला कलेक्टर को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था।

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