Congress Party Workers Used a minor girl in his protest for cheap publicity - रैली में नाबालिग बच्‍चे के इस्‍तेमाल के बाद मुश्किल में कांग्रेस, मामला दर्ज - Jansatta
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मुश्किल में कांग्रेस, चिलचिलाती धूप में बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन में बच्चे को किया शामिल

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आठ साल की बच्ची का इस्तेमाल प्रतीक के रूप में इस रैली में किया। ये सारा वाकया उस वक्त हुआ जब वहां पर तेज चिलचिलाती धूप थी। घटना का वीडियो वायरल होने पर कांग्रेस की खूब फजीहत हो रही है। वहीं असम बाल कल्याण आयोग ने भी इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया है।

बुधवार (6 जून) को असम में तेल की बढ़ती कीमतों का विरोध करते असम प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकर्ता। फोटो- पीटीआई

तेल की बढ़ती कीमतों का विरोध करने के लिए बुधवार (6 जून) को असम कांग्रेस की राज्य इकाई ने रैली का आयोजन किया ​था। लेकिन इस रैली में कांग्रेस से एक गलती हो गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आठ साल की बच्ची का इस्तेमाल प्रतीक के रूप में इस रैली में किया। ये सारा वाकया उस वक्त हुआ जब वहां पर तेज चिलचिलाती धूप थी। घटना का वीडियो वायरल होने पर असम कांग्रेस की खूब फजीहत हो रही है। वहीं असम बाल कल्याण आयोग ने भी इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया है। बच्ची की मां, जो खुद कांग्रेसी नेता हैं, उसे हिरासत में लेकर कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

चिलचिलाती धूप में बच्ची का इस्तेमाल: ये रैली कांग्रेस ने बुधवार (6 जून) को उत्तरी लखीमपुर जिले में निकाली थी। इस रैली का मकसद बढ़ती तेल कीमतों का विरोध करना था। रैली के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आठ साल की लड़की को धोकुवा (सुपारी के पेड़ के सूखे पत्ते) पर बैठाकर तने से खींचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के वक्त वहां तेज धूप थी। जिस वक्त ये प्रदर्शन हो रहा था, वहां पर बच्ची की मां मौजूद थी। बच्ची की मां कांग्रेस के महिला मोर्चे की सदस्य हैं।

मां ने कहा, इसमें गलत क्या है?: हालांकि बच्ची की मां को बच्ची के इस अमानवीय दुरुपयोग का कोई दुख नहीं है। लड़की की मां ने कहा,”प्रदर्शन के दौरान मेरी बेटी को धोकुआ पर बैठाना कोई अपराध नहीं है। मीडिया ने इस सांकेतिक प्रदर्शन का गलत मतलब निकाल लिया। इसके जरिए दिखाया गया था कि पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से कल को हमें हमारे बच्‍चों को धोकुआ पर बैठाकर स्कूल के लिए भेजना पड़ सकता है। मेरी बेटी थोड़ी सी देर, मुश्किल से एक मिनट के लिए वहां थी।”

पहले इकरार, फिर इंकार: नाबालिग बच्ची का वीडियो वायरल होने से पहले लखीमपुर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व कांग्रेस नेता जयप्रकाश दास ने मीडिया को बताया था क्योंकि माता-पिता अब अपने बच्चों को बसों में स्कूल भेजने में सक्षम नहीं हैं, ऐसे धोकुवा ही उनके लिए आशा की किरण है। इसके बाद तीखी आलोचनाओं के चलते गुरुवार (7 जून) को दास ने अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगी और रैली में नाबालिग के इस्तेमाल की इजाजत पर खेद प्रकट किया। दास ने मीडिया को बताया कि नाबालिग लड़की का इस्तेमाल करना एक भावनात्मक निर्णय था। यह एक गलती थी और एक नेता के रूप में, मैं जिम्मेदारी लेता हूं। यह जानबूझकर नहीं था।

पुलिस ने लिया संज्ञान: लखीमपुर पुलिस ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। बच्‍ची की मां को हिरासत में लिया गया और उस पर कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। असम बाल कल्‍याण संरक्षा आयोग ने भी मामले में संज्ञान लिया है। मामले के तूल पकड़ने पर कांग्रेस ने माफी मांग ली और बच्‍ची की मां की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह घटना पार्टी की एक कार्यकर्ता की भावुक अभिव्‍यक्ति थी। लेकिन पार्टी ने प्रदर्शन के चलते बच्‍ची पर ध्‍यान नहीं दिया। गलत हुआ है और कानून के तहत जो सजा मिलेगी उसे माना जाएगा।

क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ: वहीं इस मामले पर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर माता-पिता जानबूझकर अपने नाबालिग बच्चों को राजनीतिक रैली जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल करने की इजाजत देते हैं तो उन पर किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत आरोप लगाया जा सकता है। इसके लिए उन्हें तीन साल तक की जेल हो सकती है।

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