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असम नागरिकता विवाद पर लिखी कविता, 10 के खिलाफ FIR

खुद के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर एक्टिविस्ट अब्दुल कलाम आजाद ने कहा, 'क्या हमें वास्तविक नागरिकों पर कविता लिखने का भी अधिकार नहीं है जिन्हें संदिग्ध नागरिकों की श्रेणी में रखा गया हो या नजरबंदी शिवरों में भेजा जा रहा है?

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

असम पुलिस ने गुरुवार (11 जुलाई, 2019) को नागरिकता विवाद पर कविता लिखने पर दस लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। जिन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई उनमें से अधिकतर लोग बंगाल मूल के मुस्लिम कवि और एक्टिविस्ट है, जो जिस भाषा में लिखते हैं उसे ‘मिया’ बोली कहा जाता है। गुवाहाटी सेंट्रल के डीसीपी धमेंद्र कुमार दास ने बताया, ‘हां… एक एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420/406 के तहत केस दर्ज किया गया है।’ वहीं खुद के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर एक्टिविस्ट अब्दुल कलाम आजाद ने कहा, ‘क्या हमें वास्तविक नागरिकों पर कविता लिखने का भी अधिकार नहीं है जिन्हें संदिग्ध नागरिकों की श्रेणी में रखा गया हो या नजरबंदी शिवरों में भेजा जा रहा है?

बता दें कि प्रदेश में गैर कानूनी रूप से आए अप्रवासियों को बाहर करने के लिए असम में करीब चालीस लाख लोगों को उनकी भारतीय नागरिकता से बेदखल किया जा रहा है। एक हिंदी वेबसाइट ने खबर दी है कि नागरिकता जाने के डर से कुछ लोगों ने सदमे से आत्महत्या कर ली। ऐसे ही एक मामले में 88 साल के अशरफ अली ने अपने परिवार से कहा कि वो बाहर से खाना लेने के लिए जा रहे हैं। मगर खाना लाने के बजाय उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। अशरफ अली और उनके परिवार को उस लिस्ट में शामिल किया गया था, जिसमें वो लोग शामिल, जिन्होंने साबित किया कि वो भारतीय हैं। मगर भारतीय नागरिक की लिस्ट में शामिल होने पर उनके एक पड़ोसी ने ही इसे चुनौती दे दी, जिसके बाद उन्हें दोबारा नागरिकता सिद्ध करने के लिए बुलाया गया।

अली के ही गांव के रहने वाले एक शख्स ने बताया, ‘उन्हें डर था कि कहीं वो इसमें फेल हो गए तो उन्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा।’ बता दें कि असम में साल 1951 में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेंस (एनआरसी) बनाया गया था, ताकि यह तय किया जा सके कि कौन असम में पैदा हुआ और भारतीय नागरिक है। और कौन पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से आया हुआ हो सकता है।

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