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संभावित विधायकों की खरीद-फरोख्त की खींचतान

छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि बीपीएफ उम्मीदवारों को शनिवार को छत्तीसगढ़ लाया गया और वे रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में ठहरे हैं। इन सभी उम्मीदवारों के मतगणना के समय दो मई तक उनके वहां रहने की संभावना है।

Assam Elections, Congress, National Newsअसम कांग्रेस चीफ रिपुण बोरा, AIUDF चीफ बदरुद्दीन अजमल और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

असम में विधानसभा का चुनाव समाप्त हो चुका है। नतीजे आने के पहले ही जीतने वाले संभावित उम्मीदवारों को तोड़कर अपने पाले में करने की होड़ लग गई है। उम्मीदवारों के विधायक बनने की संभावना के आधार पर खरीद-फरोख्त की कोशिश के आरोपों के घेरे में मुख्य तौर पर भाजपा है। कांग्रेस-ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि कई ऐसे उम्मीदवारों से भाजपा द्वारा संपर्क साधे जाने के बाद उन्हें प्रदेश से बाहर पहुंचाना शुरू कर दिया गया है। संभावित विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका को लेकर नेताओं को जयपुर एवं रायपुर पहुंचाया गया है। इस बीच, विपक्षी एआइयूडीएफ ने भी दावा किया है कि भाजपा के आठ नेता उनके संपर्क में हैं।

तीन दिन पहले विपक्षी महागठबंधन के 22 उम्मीदवारों को विशेष विमान के जरिए कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान भेजा गया। आठ उम्मीदवारों को रायपुर भेजा गया है। कुछ और कांग्रेस उम्मीदवारों को भी जल्द ही जयपुर स्थानांतरित कर दिए जाने की चर्चा है। सभी विधायकों को फेयरमाउंट होटल में रखा गया है। विपक्षी महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि यह एहतियाती कदम है। हाल ही में छह अप्रैल को असम में तीसरे और आखिरी चरण का मतदान खत्म हुआ। दो मई को विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे। चर्चा है कि एआइयूडीएफ अपने उम्मीदवारों को राजस्थान से दुबई भी ले जाया जा सकता है। एआइयूडीएफ असम की 10 पार्टियों और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के महागठबंधन का एक घटक है।

प्रदेश से बाहर जयपुर ले जाए गए विपक्षी उम्मीदवारों के साथ एआइयूडीएफ के आयोजन सचिव एमडी अमीनुल इस्लाम को लगाया गया है। वे कहते हैं, भाजपा की राजनीतिक चालों और हमारे उम्मीदवारों को प्रभावित करने की कोशिश को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। व्यस्त चुनाव प्रचार के बाद, हमारे उम्मीदवार अजमेर शरीफ दरगाह की यात्रा भी करना चाहते थे। इस्लाम के अलावा पार्टी ने अपने दो अन्य वरिष्ठ नेताओं को राजस्थान भेजा है। इस्लाम ने कहा, भाजपा इस चुनाव को हारने जा रही है और उसके पास केवल एक ही विकल्प बचा है यानी दूसरे दलों के विधायकों से साठगांठ बिठाने की कोशिश, इसलिए हमें सावधान रहने की जरूरत है। हमने पहले भी गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनावों के दौरान यह सब देखा है।

एआइयूडीएफ ने वर्ष 2016 में कुल 126 में से 13 सीटें जीती थीं। बांग्लादेश मूल के बंगाली मुसलमानों के बीच महत्त्वपूर्ण प्रभाव रखने वाली पार्टी ने इस चुनाव में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें एक अप्रैल और छह अप्रैल को दूसरे और तीसरे चरण के मतदान हुए थे। कांग्रेस ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था। अन्य एक घटक दल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे।

अपने पिछले अनुभवों को देखते हुए एआइयूडीएफ अपने विधायकों के पास पार्टी बदलने की कोई संभावना नहीं छोड़ना चाहती है। पार्टी के नेता मणिपुर चुनाव का हवाला देते हैं, जब कांग्रेस ने 60 सीटों में से 28 सीटें हासिल की थीं और भाजपा ने 22 सीटें जीती थीं, लेकिन भाजपा सरकार बनाने के लिए कुछ विधायकों को अपने पाले में करने में सफल हो गई थी।

छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि बीपीएफ उम्मीदवारों को शनिवार को छत्तीसगढ़ लाया गया और वे रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में ठहरे हैं। इन सभी उम्मीदवारों के मतगणना के समय दो मई तक उनके वहां रहने की संभावना है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम चुनाव के लिए कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया था। उन्होंने विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति तैयार करने के लिए असम में कई सप्ताह बिताए थे।

चुनाव लड़ चुके विपक्षी महागठबंधन के नेताओं को जयपुर और रायपुर ले जाया जा रहा नेताओं का दावा, भाजपा ने तोड़ने की कोशिश में अभी से ही संपर्क साधना शुरू किया विपक्षी गठबंधन की एआइयूडीएफ ने भी भाजपा के कुछ नेताओं के संपर्क में होने का दावा किया विपक्षी महागठबंधन के 22 उम्मीदवारों को विशेष विमान के जरिए कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान भेजा गया।

हाल ही में छह अप्रैल को असम में तीसरे और आखिरी चरण का मतदान खत्म हुआ। दो मई को विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे। चर्चा है कि एआइयूडीएफ अपने उम्मीदवारों को राजस्थान से दुबई भी ले जाया जा सकता है। एआइयूडीएफ असम की 10 पार्टियों और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के महागठबंधन का एक घटक है।

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