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गरीब का नहीं था कोई सहारा, कांग्रेस एमएलए ने अर्थी को कंधा दे जीता लोगों का दिल

विधायक रुपज्योति कुर्मी का कहना है कि 'वह (मृतक दिलीप डे) बेहद गरीब और अकेले थे। ऐसे में एक इंसान होने के नाते और लोगों का प्रतिनिधि होने के नाते मैंने यह जिम्मेदारी उठायी।

असम के विधायक ने गरीब की अर्थी को दिया कंधा। (image source-facebook/roopjyoti fan club)

असम के जोरहाट जिले के मारियानी कस्बे में रहने वाले दिलीप डे नामक व्यक्ति के घर-परिवार में उनके दिव्यांग चचेरे भाई के अलावा कोई नहीं था। गुरुवार को जब दिलीप डे की मौत हुई तो उनकी अर्थी को कंधा देने के लिए जरुरी लोग भी कम पड़ गए। इस पर कांग्रेस के एक विधायक ने मृतक के शव को ना सिर्फ कंधा दिया, बल्कि मृतक के अंतिम संस्कार का भी पूरा इंतजाम किया। विधायक के इस कदम ने लोगों का दिल जीत लिया और लोग खुले दिल से विधायक की प्रशंसा कर रहे हैं।

ये विधायक हैं कांग्रेस के रुपज्योति कुर्मी (40 वर्ष), जिन्होंने दरियादिली दिखाते हुए और जनता का सच्चा प्रतिनिधि होने के नाते यह जिम्मेदारी उठायी। विधायक रुपज्योति कुर्मी का कहना है कि ‘वह (मृतक दिलीप डे) बेहद गरीब और अकेले थे। ऐसे में एक इंसान होने के नाते और लोगों का प्रतिनिधि होने के नाते मैंने यह जिम्मेदारी उठायी। मैं उनके लिए जो कर सकता था, उसके मुकाबले यह कुछ भी नहीं है।’ बता दें कि जब दिलीप डे की मौत हुई तो उनके पड़ोसी रुपम गोगोई को इसकी जानकारी हुई। जिसके बाद रुपम ने ही विधायक रुपज्योति कुर्मी को इसकी सूचना दी।

उल्लेखनीय है कि स्थानीय लोगों के बीच विधायक रुपज्योति कुर्मी की छवि काफी अच्छी है। इससे पहले भी विधायक कई बार लोगों की मदद करते नजर आ चुके हैं। कहा जाता है कि जुलाई 2017 में भी जब असम में बाढ़ आयी थी, तब विधायक रुपज्योति कुर्मी ही अपने कंधे पर 50 किलो चावल की बोरी लादकर काजीरंगा नेशनल पार्क स्थित रिलीफ कैंप में लेकर गए थे। बता दें कि शुक्रवार को दिलीप डे का अंतिम संस्कार कराकर दिलीप डे ने एक अन्य स्थानीय ऑटो रिक्शा ड्राइवर की मां के जनाने को भी कंधा दिया। रुपज्योति कुर्मी मारियानी विधानसभा सीट से 3 बार चुनाव जीत चुके हैं और साल 2006 में पहली बार विधायक चुने गए थे। रुपज्योति कुर्मी की मां भी इस सीट से विधायक रह चुकी हैं।

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