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असम नागरिकता विवादः BJP के लिए चुनावी गाना गाने वाले जुबीन बोले- मेरी आवाज से जुटाए वोट वापस दो

'प्रिय सर्बानंद दा, कुछ दिनों पहले पत्र लिखा था। हो सकता है आप काले झंडे गिनने में व्यस्त होंगे। क्या मुझे वो वोट वापस मिल सकते हैं जो 2016 में मेरी आवाज का इस्तेमाल कर आपने जुटाए थे।'

Author January 14, 2019 2:10 PM
जुबिन गर्ग (फोटोः Zubeen Garg Official)

असम में नागरिकता को लेकर चल रहे बवाल के बीच प्रसिद्ध असमिया गायक जुबीन गर्ग ने भाजपा को फिर निशाने पर लिया है। पांच दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को नागरिकता संशोधन बिल 2016 पर पत्र लिखने वाले जुबीन ने अपने गाए गाने का इस्तेमाल कर जनता से मांगे गए वोट वापस करने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि असम विधानसभा चुनाव 2016 के लिए प्रचार में भाजपा ने जुबीन के गाए गाने का इस्तेमाल किया था।

सीएम के नाम खुला खतः सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक पोस्ट में जुबीन ने गाने के लिए भाजपा से मिले पैसे भी वापस करने की पेशकश की है। उल्लेखनीय है कि फेसबुक पर जुबीन के करीब साढ़े लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनकी यह मांग तेजी से वायरल हो गई है। फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘प्रिय सर्बानंद सोनोवाल दा, कुछ दिनों पहले पत्र लिखा था। हो सकता है आप काले झंडे गिनने में व्यस्त होंगे। क्या मुझे वो वोट वापस मिल सकते हैं जो 2016 में मेरी आवाज का इस्तेमाल कर आपने जुटाए थे। मैं उसकी लिए मिली रकम वापस करने को तैयार हूं।’

पहले लिखा था यह पत्रः पिछले हफ्ते जुबीन ने मुख्यमंत्री को सात दिनों के भीतर यह विवादित बिल वापस नहीं लिए जाने पर प्रदर्शन की धमकी दी थी। उन्होंने लिखा था, ‘नागरिकता बिल लोकसभा में पास होने पर भी सोनोवाल इसे ना कह सकते हैं। अभी बोलो, बाकी बाद में देखा जाएगा। मैं एक हफ्ते तक मैं असम में नहीं रहूंगा। मेरे वापस आने से पहले आपने कोई कदम उठाया तो अच्छा रहेगा। वरना इसके बाद मैं क्या करूंगा मैं भी नहीं जानता।’

क्या है नागरिकता संशोधन बिलः नागरिकता संशोधन बिल को लाने का मकसद नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव करना है। इस बदलाव का मकसद हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्मों के उन लोगों को भारत की नागरिकता देना है जो अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार थे और 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके थे। इसके साथ ही देश में उनके रहने की सीमा को 12 साल से घटाकर छह साल करना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। इसके जरिये समुचित दस्तावेज न होने पर भी उन्हें नागरिकता देने की कोशिश की जा रही है।

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