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देश के सबसे लंबे पुल पर भूकंप का भी नहीं होगा असर, साथ-साथ दौड़ेंगी ट्रेन व कारें

अधिकारी के मुताबिक, पुल पर भारतीय सेना के टैंक से लेकर 1700 मेगाटन तक का बाकी सामान लाया-ले जाया जा सकता है।

Author December 19, 2018 6:00 PM
बोगीबील पुल की लंबाई लगभग पांच किलोमीटर है। (एक्सप्रेस फोटो)

असम में देश का सबसे लंबा रेल और सड़क मार्ग वाला पुल बनकर तैयार हो चुका है। इसका नाम बोगीबील ब्रिज है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस पुल पर साथ-साथ रेलगाड़ियां और अन्य वाहन दौड़ेंगे। खास बात है कि करीब पांच किमी लंबे इस पुल पर 7 रिक्टर स्केल या उससे अधिक के भूकंप के झटकों का असर भी नहीं होगा। यही नहीं, यह भारत का पहला पूरी तरह वेल्डिंग किया हुआ पुल है।

आगामी मंगलवार (25 दिसंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे, जबकि इसकी नींव साल 1997 में तत्कालीन पीएम एचडी देवगौड़ा ने रखी थी। हालांकि, इसे बनवाने का काम दिवंगत पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार (2002) में शुरू हुआ था। पुल को बनाने के पीछे का मकसद देश के पूर्वी बॉर्डर से अन्य हिस्सों के बीच के आवागमन को सुलभ और सरल बनाना है।

बोगीबील पुल के जरिए अरुणाचल प्रदेश और चीन की सरहद से लगे अन्य प्रदेशों से आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा। डिब्रूगढ़ को यह ढेमाजी से जोड़ेगा। ‘गुवाहाटी प्लस’ की रिपोर्ट में हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरवीआर किशोर के हवाले से बताया गया कि यह पुल सेस्मिक जोन-4 में है और इस जोन में 7 या उससे अधिक रिक्टर स्केल वाले भूकंप आते रहते हैं। ऐसे में सेस्मिक रेस्ट्रेनर्स इस पुल में सहारे के लिए लगाए गए हैं, ताकि यह भूकंप के झटके को आसानी से झेल सके।

बकौल किशोर, “पुल पर भारतीय सेना के टैंक से लेकर 1700 मेगाटन तक का बाकी सामान लाया-ले जाया जा सकता है। पुल को बनाने में वेल्डेड गार्डर तकनीक और उच्च गुणवत्ता के सामान को इस्तेमाल किया गया।” कुछ अन्य रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह पुल स्वीडेन और डेनमार्क को जोड़ने वाले पुल की तर्ज पर देश में तैयार किया गया है।

इतना ही नहीं, पुल शुरू होने के बाद डिब्रूगढ़ से अरुणाचल की दूरी 100 किमी कम हो जाएगी। मौजूदा समय में लोगों को गुवाहाटी होकर अरुणाचल जाना पड़ता है। यह यात्रा कुल 500 किमी से अधिक की होती है। पर पुल चालू होने के बाद यह यात्रा 400 किमी की हो जाएगी।

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