असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी हैट्रिक लगाने की कोशिश में है तो वहीं कांग्रेस असम में वापसी की उम्मीद जता रही है। इस बीच बीते कुछ दिनों में दो बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस राजनीति का केंद्र बन गईं। पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्यमंत्री सचिवालय के एक कॉन्फ्रेंस रूम में हुई, जिसे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पांच कैबिनेट मंत्रियों के साथ संबोधित किया। वहीं दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस गुवाहाटी के राजीव भवन में हुई, जिसे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ संबोधित किया।

हिमंता ने क्या आरोप लगाए?

मुख्यमंत्री हिमंता ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट शेयर की। SIT इस आरोप की जांच कर रही थी कि असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ‘पाकिस्तान एजेंट’ हैं। हिमंता ने गोगोई के अलावा उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न पर भी आरोप लगाए। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया कि 2013 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान गौरव गोगोई की आवाजाही से जुड़ी अनुमति पाक गृह मंत्रालय ने बदल दी थी। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान गौरव गोगोई कुछ प्रशिक्षण सत्रों में शामिल हुए हो सकते हैं और 2014 में सांसद बनने के बाद गोगोई ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कई सवाल उठाए।

सीएम हिमंता सरमा ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ के बीच संबंधों की जांच जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि अली तौकीर शेख ने 2010 से 2013 के बीच कई बार भारत का दौरा किया और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़ा रहा। हिमंता ने आगे कहा कि गौरव गोगोई की पत्नी को एक पाकिस्तानी कंपनी में नौकरी दी गई और उनका वेतन भी कथित तौर पर पाकिस्तानी नागरिक द्वारा दिया जाता था।

गौरव गोगोई ने हिमंता पर जमीन हड़पने का लगाया आरोप

वहीं सभी आरोपों का जवाब देते हुए गौरव गोगोई ने हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुयान सरमा को निशाना बनाते हुए उन पर निशाना साधा। कांग्रेस ने उन पर आरोप लगाया कि हिमंता अपने परिवार को समृद्ध करने के लिए राजनीति में आए हैं और राज्य भर में अपने परिवार के नाम पर जमीन हड़प रहे हैं।

यह टकराव पहले से ही तय था, जिसकी नींव तब से रखी जा रही थी जब यह स्पष्ट हो गया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद गौरव गोगोई राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाएंगे। कभी हिमंता, तरुण गोगोई (गौरव के पिता) के करीबी थे। लेकिन तरुण गोगोई द्वारा अपने बेटे को बढ़ावा देने के बाद उनका उनसे मतभेद हो गया और वे भाजपा में शामिल हो गए। वर्षों से दोनों के बीच जुबानी जंग और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा है।

क्या कांग्रेस को मिल गया चेहरा?

हालांकि इस घटनाक्रम से असम कांग्रेस को प्रदेश में एक चेहरा मिल गया, जो उसे 2020 से ही तलाश थी। कांग्रेस ने 2021 का चुनाव भाजपा की तरह ही बिना मुख्यमंत्री उम्मीदवार के लड़ा था। तब गौरव गोगोई के साथ नागांव के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा और विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के बेटे देबब्रता सैकिया पार्टी के बड़े चेहरे थे।

एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “मुख्यमंत्री द्वारा लगाए जा रहे कुछ आरोपों और इशारों से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है, लेकिन इस मुकाबले को अपने और गौरव गोगोई के बीच का मुकाबला बताकर कांग्रेस को निश्चित रूप से फायदा हो रहा है। इससे गौरव गोगोई की सार्वजनिक छवि मजबूत हो रही है। कांग्रेस के सामने आंतरिक समन्वय सहित कई अन्य मुद्दे हो सकते हैं, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह पार्टी और चुनाव प्रचार का चेहरा हैं।”

यह चुनाव राज्य की राजनीति में गौरव गोगोई के नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा है, हालांकि वे 2014 से सांसद हैं। जून 2024 में उन्हें लगातार हार झेल रही राज्य कांग्रेस इकाई का नेतृत्व सौंपा गया था। गौरव गोगोई ने 2024 में जोरहाट लोकसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी। यहां काफी कड़ा मुकाबला हुआ था और भाजपा की ओर से हिमंता सरमा ने मोर्चा संभाला था। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह गौरव गोगोई की असम की राजनीति में एक एंट्री थी। इससे पहले गौरव गोगोई कालियाबोर से दो बार सांसद रह चुके हैं।

कई समस्याओं से जूझ रही कांग्रेस

इसके बावजूद कांग्रेस पिछले कई वर्षों से समस्याओं से जूझ रही है। संगठन में लगातार गिरावट, कार्यकर्ताओं और नेताओं का भाजपा में शामिल होना, अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन बनाने में कठिनाई और भाजपा के बढ़ते प्रभाव का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए अपनी खुद की रणनीति तैयार करने में असमर्थता कांग्रेस के लिए चुनौतियां रहीं। दिल्ली में पले-बढ़े गौरव गोगोई को शहरी और शांत स्वभाव का माना जाता है, जो वर्षों से राज्य की जमीनी राजनीति से दूर रहे हैं।

एक युवा कांग्रेसी नेता ने कहा, “उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से मनोबल में काफी वृद्धि हुई है, क्योंकि वे हिमंता बिस्वा सरमा का मुकाबला कर सकते हैं। लेकिन समय उनके खिलाफ हो सकता है, क्योंकि सीमित संसाधनों के साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए बहुत कम समय मिला है।” पढ़ें असम बीजेपी के AI वीडियो पर क्या है विवाद

असम बीजेपी के AI वीडियो पर विवाद, कांग्रेस बोली- यह सामूहिक हिंसा और नरसंहार का आह्वान