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‘आप’ में जातिगत सियासत पर सवाल, मनोज तिवारी ने बताया जातपात का गंदा खेल

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) राजनीतिक लाभ के लिए राजनीति के स्तर को किसी भी हद तक गिराने को तैयार रहती है। चाहे जाति का खेल खेलना हो या फिर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का अरविंद केजरीवाल हमेशा आगे रहते हैं।

आशुतोष के इस ट्वीट पर बवाल इसलिए मचा क्योंकि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट की प्रभारी व पार्टी की की प्रत्याशी आतिशी मार्लेना ने अपना यह उपनाम हटा लिया।(फ़ोटो-पीटीआई)

आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ने वाले आशुतोष के एक ट्वीट से बुधवार को सूबे की सियासत गरमा गई है। उन्होंने लिखा कि 23 साल के पत्रकारिता के करियर में किसी ने कभी उनकी जाति नहीं पूछी लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में जब वे आम आदमी पार्टी के टिकट पर चांदनी चौक से चुनाव मैदान में उतरे तो जबरन उन्हें अपने नाम के आगे अपना उपनाम भी जोड़ना पड़ा ताकि उनकी जाति का पता लग सके।

आशुतोष के इस ट्वीट पर बवाल इसलिए मचा क्योंकि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट की प्रभारी व पार्टी की की प्रत्याशी आतिशी मार्लेना ने अपना यह उपनाम हटा लिया। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि आतिशी को उनके करीबी कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनके उपनाम को आधार बनाकर कुछ दिनों से विरोधियों की ओर से ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही रही थीं। कहा जा रहा है था कि आतिशी विदेशी हैं या ईसाई हैं। इसके चलते आतिशी ने ‘मार्लेना’ सरनेम हटाने का फैसला लिया।

आतिशी के फैसले के अगले ही दिन आशुतोष का ट्वीट सामने आ गया। इसका सीधा मतलब यह निकाला गया कि अन्य दलों की तरह ही आप में भी जाति, धर्म आदि के आधार पर टिकटों का बंटवारा होता है या पार्टी भी चुनाव लड़ने के लिए वैसे ही हथकंडे अपनाती है जैसे हथकंडे अपनाने के आरोप कांग्रेस, भाजपा आदि दलों पर लगाए जाते हैं। आशुतोष ने ट्वीट में लिखा कि मेरे पत्रकार जीवन के 23 साल के लंबे करियर में किसी ने कभी मेरे सरनेम या जाति के बारे में नहीं पूछा। लेकिन जब 2014 में जब मैंने लोकसभा का चुनाव लड़ा तो मुझे अपने नाम के साथ सरनेम लगाने को कहा गया। इसका मैंने विरोध भी किया था। जिन लोगों ने मुझे ऐसा करने को कहा था उनका कहना था कि उस इलाके में बड़ी संख्या में मेरी जाति के लोग रहते हैं। यदि आप अपनी जाति नहीं बताएंगे तो आपको वोट कैसे मिलेंगे?’

दिलचस्प यह भी है कि जब आशुतोष के इस ट्वीट को लेकर भाजपा ने आप और पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला तो आशुतोष ने एक के बाद एक दो तीन ट्वीट कर अपनी सफाई दी और भाजपा पर हमला भी बोला। उन्होंने कहा कि अब वे आम आदमी पार्टी के सदस्य नहीं हैं, लिहाजा उनके ट्वीट को पार्टी की किसी गतिविधि से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

भावनाओं को भुनाने में ‘आप’ अव्वल

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) राजनीतिक लाभ के लिए राजनीति के स्तर को किसी भी हद तक गिराने को तैयार रहती है। चाहे जाति का खेल खेलना हो या फिर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का अरविंद केजरीवाल हमेशा आगे रहते हैं। तिवारी ने कहा कि यह खेद का विषय है कि जो लोग परिवर्तन की राजनीति के नाम पर सत्ता में आए वह आज देश की राजधानी में जातीय विष घोलने और धार्मिक उन्माद फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, आम आदमी पार्टी दिल्ली में कभी सिखों, कभी मुसलमानों तो कभी ईसाईयों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने का खेल खेलती रही है। दिल्ली में ईसाई चर्चों की बेअदबी हो, पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब से बेअदबी हो या बवाना उपचुनाव में मुस्लिम धु्रवीकरण की अपील। इन सभी में आम आदमी पार्टी के नेताओं की भूमिका सामने आती है पर इस बार केजरीवाल दल के जातपात के गंदे खेल का जो स्वरूप सामने आया है वह निंदनीय है।

तिवारी ने कहा कि कल दिल्ली एवं देश ने देखा की आप की एक महिला नेता अतिशि ने जातीय उपनाम हटाया तो एक दूसरे संस्थापक नेता आशुतोष ने बताया किस तरह 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व उन्हें उनकी जाति सार्वजनिक करने को बाध्य किया गया। बताया जाता है की अतिशि का जातीय उपनाम एक अल्पसंख्यक नाम है और केजरीवाल दल को लगता है कि उनका उपनाम उन्हें राजनीतिक नुकसान दे सकता है अत: अब तक का उनका सार्वजनिक जातीय उपनाम कल हटाने को बाध्य किया गया। दूसरी ओर पार्टी के एक संस्थापक नेता आशुतोष ने कल सार्वजनिक किया कि किस तरह 2014 के लोकसभा चुनाव का नामांकन करते वक्त अपनी वैश्य जाति उपनाम गुप्ता उपयोग करने के लिए बाध्य किया गया।

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